न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार को उच्चतम न्यायालय की फटकार और लताड़!

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज (११ जनवरी) न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार को उच्चतम न्यायालय ने जमकर फटकारते और लताड़ते हुए कहा है कि सरकार कृषि क़ानून को स्थगित क्यों नहीं कर रही है; यदि वह ऐसा नहीं करती है तो न्यायालय ही वैसा करने के लिए आदेश करेगा। न्यायालय के विज्ञ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आन्दोलनरत पैंसठ किसानों की मृत्यु हो चुकी है और सरकार अपनी ज़िद को लेकर अड़ी हुई है? सरकार इस पर शीघ्र कोई ऐसा निर्णय करे कि ठण्ड के प्रकोप में आन्दोलनरत किसानों के साथ उनके परिवार के आबाल-वृद्ध-नर-नारी अपने-अपने घर लौट सकें। न्यायालय ने सुस्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार ने किसानों के साथ ईमानदारी से वार्त्ता नहीं की है। उसने मामले को टालने की कोशिश की है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कथित मोदी-सरकार के प्रतिनिधि किसान-आन्दोलन को येन-केन-प्रकारेण कमज़ोर करना चाहते हैं और तारीख़-पर-तारीख़ देकर वार्त्ता को असफल करते हुए, सारा ठीकरा किसानों पर फोड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि किसानों की एक मात्र माँग ‘तीनों क़वानीन को निरस्त किया जाये’, के प्रति कथित सरकार कहीं से भी गम्भीर नहीं दिख रही है। इतना ही नहीं, किसानों के आन्दोलन को शिथिल करने के लिए वह उनके समानान्तर छद्म किसानों की एक टोली बनवाकर उन्हें किसान-क़वानीन के समर्थक बताने से भी नहीं चूक रही है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने सुस्पष्ट कर दिया है कि सरकार यदि यह कहती है कि बहुसंंख्यक वे किसान हैं, जो क़ानून का समर्थन कर रहे हैं, इसलिए सरकार का़नून वापस नहीं लेगी तो हम उन किसानों की माँग की भी उपेक्षा नहीं कर सकते, जो उन्हीं क़वानीन को ख़त्म करने की माँग को लेकर आन्दोलनरत हैं।

बहरहाल, सरकार के अड़ियल रुख़ के प्रति उच्चतम न्यायालय का कठोर दृष्टिकोण स्वागत-योग्य है। अब किसानों के अधिकार की रक्षा के प्रति एक नयी चेतना जाग्रत् होगी, ऐसी सम्भावना उत्पन्न हो चुकी है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ११ जनवरी, २०२१ ईसवी।)