ढपोरशंखी नीयत है छल रही

November 29, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• खेती-किसानी है जल रही, शासन की नीति है खल रही। कौन-सा गुनाह था किसानों का? उनकी ख़ुशी हाथ है मल रही। धोखा बना आश्वासन का सूरज, चहुँ दिशि बदली […]