धरती पर फिर गूँज उठे मर्यादा पुरुषोत्तम नाम प्रिये
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मर्यादा की रेखा मे ही, जग का सारा मान प्रिये।सूरज, चन्दा, नवग्रह रखते इस मर्यादा का भान प्रिये।सागर क्षुब्ध मगर सीमा मे, सीमा मे ही वायु बहे।जिस दिन ये मर्यादा टूटी, […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मर्यादा की रेखा मे ही, जग का सारा मान प्रिये।सूरज, चन्दा, नवग्रह रखते इस मर्यादा का भान प्रिये।सागर क्षुब्ध मगर सीमा मे, सीमा मे ही वायु बहे।जिस दिन ये मर्यादा टूटी, […]