प्रकृति, करुणा और कर्तव्य की दृष्टि मे धर्म का वास्तविक स्वरूप
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव सभ्यता के विकास के साथ धर्म ने अनेक रूप धारण किए हैं। समय, समाज, परंपराओं और विभिन्न मान्यताओं ने धर्म की व्याख्याओं को विस्तृत भी किया और कई बार जटिल […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– मानव सभ्यता के विकास के साथ धर्म ने अनेक रूप धारण किए हैं। समय, समाज, परंपराओं और विभिन्न मान्यताओं ने धर्म की व्याख्याओं को विस्तृत भी किया और कई बार जटिल […]
धर्म क्या है? जीवन में पारस्परिक सहजीविता के आधार पर “न्यायपूर्वक” जीना ही धर्म है। धर्म जीवन को कभी दो भागों में नहीं बाँटता था। राजनीति ने जीवन को दो भागों में बाँट दिया-एक शोषक […]
जीवन में पारस्परिक सहजीविता के आधार पर “न्यायपूर्वक” जीना ही धर्म है। धर्म जीवन को कभी दो भागों में नहीं बाँटता था..राजनीति ने जीवन को दो भागों में बाँट दिया-एक शोषक और दूसरा शोषित । […]