सनातन धर्म, भारतीय दर्शन और आत्मबोध की परंपरा के आलोक में दिव्य जीवन का प्रथम चरण

July 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भारतीय दर्शन का मूल प्रयोजन केवल तात्त्विक विमर्श या बौद्धिक जिज्ञासा की तुष्टि नहीं है, अपितु मानव जीवन को उसके परम पुरुषार्थ—आत्मसाक्षात्कार एवं ब्रह्मानुभूति—की ओर उन्मुख करना है। भारतीय मनीषा के […]

योगी आदित्यनाथ : एक वास्तविक नेता

February 1, 2025 0

शाश्वत तिवारी– बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भगवा पोशाक पहनते हैं, इसलिए  एक “सन्यासी” हैं, लेकिन उनके बारे में जो तथ्य सामने आए हैं वो चौंकाने वाले ओर प्रेरणादाई हैं। सबको […]

सनातन धर्मानुसार मनुष्यों में न्याय की प्रवृत्ति का परिचय

May 8, 2023 0

जो अन्याय करता है, और कभी नहीं चाहता की न्याय हो, उसे निषाद कहते हैं।उसे अन्त्यज कहते हैं।उसे बहिष्कृत्य और परित्यज्य कहते हैं।उसे अस्पृश्य कहते हैं।उसे अछूत कहते हैं।उसे असामाजिक तत्त्व कहते हैं।उसे असभ्य कहते […]

जो ज्ञान-विज्ञान की कसौटियों पर खरा नहीं, वह सनातन धर्म का अंग भी नहीं

February 10, 2023 0

न्यायप्रेमी इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़े व मनन करें। आजकल की पूजा-पाठ को ही लोग धर्म समझ बैठे हैं..!किसी की पूजा और कोई विशेष तरह की उपासना या साधना या विशेष प्रकार का वस्त्र […]

सनातन सतधर्म में मनुष्यों पर केवल तीन ऋण

January 8, 2023 0

सैद्धांतिक दृष्टि से सनातन सतधर्म में मनुष्यों पर केवल तीन ऋण होते हैं… ये तीनो ऋण ब्रह्मचर्य आश्रम के 25 वर्षीय विद्यार्थी जीवन के दौरान उत्पन्न होते हैं। वह SQ तो इन तीनों ऋणों को […]