‘जड़ मानव’ को समझने की आवश्यकता

March 7, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज के अधिकतर कलमधारियों और छद्मवेशी साहित्यकारों की न तो कोई रचना-पद्धति है; न रचना-शैली है और न ही रचना-प्रक्रिया, फिर चिन्तन-मनन तो दूर की बात। उनके सर्जन में भाव-दर्शन होता है […]