साधारण श्रमिकों के श्रम से उपार्जित पारिश्रमिक पर खुलेआम डाका
कल मजदूर दिवस था इसलिए सोचा कुछ लिखूँअतः यह आर्टिकल मेरे शारीरिक/मानसिक/भावनात्मक/चेतनात्मक श्रमिक भाइयों/बहनों/माताओं/बुजुर्गों को समर्पित है जो पिछले हज़ारों सालों से अपना पारिश्रमिक लुटवा रहे हैं धूर्त सरकारों व उनके डाकू उद्यमियों द्वारा .. […]