‘आवाज उठाने की स्वतंत्रता’ ही आज के समय में ‘गाँधीजी’ का जंतर है
डॉ० निर्मल पाण्डेय (इतिहास-व्याख्याता/लेखक) विद्रोह दरअसल ‘विरोध की वृत्ति/प्रवृत्ति’ की उन्नत अभिव्यक्ति है। विरोध करना सही मायनों में हमारे-आपके जीवित होने का प्रमाण है। और जो व्यवस्था ‘बिना किसी तर्क’, ‘बिना किसी बहस’ के विरोध […]