ब्राह्मण : पुनर्मूल्यांकन की अनिवार्यता

January 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सबसे पहले ब्राह्मण को पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। यह कथन किसी वर्गविशेष के अपमान या सामाजिक विद्वेष से प्रेरित नहीं, अपितु धर्म-संरक्षण और सामाजिक सुचिता की गम्भीर चेतावनी है। जिस प्रकार […]

महाशिवरात्रि से ही ‘सृष्टि’ का आरम्भ हुआ था

February 25, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• ‘शिव’ का अर्थ कल्याण, शुभ, मंगल इत्यादिक है। शिव की दो काया मानी गयी है :– सूक्ष्म और स्थूल। जिसका प्रकटीकरण स्थूल रूप मे होता है, वह ‘स्थूल काया’ है […]

मन की दोहरी प्रकृति

November 23, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– मन एक बेचैन बंदर की तरह है, जो लगातार एक विचार से दूसरे विचार के मध्य झूलता रहता है। मन ही हमारी भावनाओं, आकांक्षाओं, भय और आसक्तियों का जन्मस्थान है। यह […]