प्रेम और आनंद की राह है कृष्ण

August 26, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार राघव– कृष्ण! निर्मोही है,इसीलिए कृष्ण सेमोह हो जाता है।कृष्ण! प्रेम कीप्रवहमान सरिता है।जिसमे जड़ और चेतनसब बह जाता है।व्याकुल कंठों की चाह है कृष्ण।प्रेम और आनंद की राह है कृष्ण।किन्तु हर नदी कीएक […]

कृष्णपथ

October 20, 2023 0

प्रेमपथ परमुझे भी चलना हैचल कान्हा मुझे भीअब तेरे संग चलना है। रंग जाऊंतेरे रंग में सांवरियाऐसा प्रेम अबमुझे भी तुमसे करना है। मिट जाए अबमन की हर अभिलाषमुझे भी तेरे संगऐसा योगनाद करना है। […]