कविता : शरणागत
मैं दीनहीन दुखियारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं जन्म-जन्म का मारा हूंमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं हर जगह से हारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।रोग शोक […]
मैं दीनहीन दुखियारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं जन्म-जन्म का मारा हूंमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं हर जगह से हारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।रोग शोक […]