एकमात्र विकल्प ‘नोटा’

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

दु:ख है, इन दिनों भारतीय समाज के कुछ लोग किसानों-बेरोज़गारों (जातिरहित) की बात न कर, संकीर्ण स्वार्थ की बात कर रहे हैं; समूह बना रहे हैं। मत भूलिए, वही लोग हैं, जो कल तक मोदी-योगी और भगवा-हिन्दुत्व का गुणगान करते अघाते नहीं थे और अब, जब क्षुद्र स्वार्थ की पूर्ति नहीं हो रही है तब विरोधी मोर्चा खोल दिये हैं।

इस आततायी सरकार के विरुद्ध अपने मन-मस्तिष्क को एकाग्र करते हुए, प्रत्येक चुनाव में ‘नोटा’ (सभी कुपात्र हैं) का बटन दबाकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १ सितम्बर, २०२० ईसवी।)