एकमात्र विकल्प ‘नोटा’
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दु:ख है, इन दिनों भारतीय समाज के कुछ लोग किसानों-बेरोज़गारों (जातिरहित) की बात न कर, संकीर्ण स्वार्थ की बात कर रहे हैं; समूह बना रहे हैं। मत भूलिए, वही लोग […]
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दु:ख है, इन दिनों भारतीय समाज के कुछ लोग किसानों-बेरोज़गारों (जातिरहित) की बात न कर, संकीर्ण स्वार्थ की बात कर रहे हैं; समूह बना रहे हैं। मत भूलिए, वही लोग […]
● नोटा नोटा नोटा देश के सम्मानित बुद्धिजीवीगण! वर्तमान मनबढ़ राजनीति को आईना दिखाने का अब समय आ गया है। बिना किसी परिणाम की चिन्ता किये आगामी चुनावों में ‘नोटा’ का बटन दबाकर अपनी उपस्थिति […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनों देश के अधिकतर राज्यों में आवृष्टि (बाढ़) से जड़-चेतन गम्भीरावस्था में हैं। केन्द्र-राज्य की सरकारों के मठाधीश निष्क्रिय दिख रहे हैं; वहीं विपक्षी दलों के ठीकेदारों की ज़बान पर ताले […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी०एस०टी० विधेयक को क़ानून बनाने का औचित्य क्या रहा है? १- किस दवा और चिकित्सीय सामग्री के मूल्यों में कमी हुई है? २- खाने-पीने की किस वस्तु के दाम में कमी हुई […]