विचार करके तो देखिए– आप कितने ईमानदार हैं?

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

इन दिनो जिन उथले और थोथले तर्कों के साथ बुलडोज़र-प्रयोग कराये जा रहे हैं और न्यायालय मे तर्क प्रस्तुत किये जा रहे हैं, वे सरकार की अबोध मानसिकता को रेखांकित करते हैं। वैसे भी इस तरह से जहाँ भी चाहें वहाँ बुलडोज़र चलवाकर किसी भी निर्माणस्थल को ज़मीदोज़ कर देना, घोर अतिवाद का प्रतीक है। मनबढ़ मानसिकता विनाश की ओर ले जाती है। यदि निर्माणकार्य अवैध थे तो सरकार गृहकर, विद्युत्कर, जलकर आदिक वर्षों से किस आधार पर लेती आ रही थी? यहाँ तो सरकार ही नंगी होती जा रही है। वे अवैध निर्माण किसकी शह पर कराये जाते रहे? क्या इसके लिए विकास प्राधिकरण और नगर निगम के सम्बद्ध अधिकारी अपराधी नहीं हैं? उनके घरों को ध्वस्त क्यों नहीं कराये जा रहे, जो करोड़ों अवैध निर्माणस्थलों के लिए साफ़तौर पर उत्तरदायी दिख रहे हैं? यहाँ सरकार यदि मौन है तो फिर दोषी कौन है?

बेशक, दोषी को दण्ड दिया जाना चाहिए; लेकिन उसके लिए निर्धारित क़ानूनी प्रक्रिया है।

अब प्रश्न है, देश मे जितने भी निर्माणकार्य हुए हैं, उनमे से कितनों के घर के नक़्शे पास हुए हैं; कितनो ने अपने निर्धारित भूभाग के भीतर ही निर्माणकार्य कराये हैं :– आपने? आपने? अथवा आपने? यदि नहीं तो वे सभी निर्माणस्थल अविलम्ब ध्वस्त कराये जाने चाहिए। आप सभी इसके लिए तैयार हैं?

इस सच को कोई भी सहजतापूर्वक पचा नहीं पायेगा; क्योंकि हम सभी “नख-शिख” भ्रष्ट हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ जून, २०२२ ईसवी।)