तो इसलिए मनाया जाता है रक्षा बंधन का त्यौहार

रामू बाजपेयी-

रक्षा बंधन का त्यौहार पूरे देश ने धूमधाम से मनाया जाता है । इस त्यौहार को भाई व बहन के स्नेह का प्रतीक माना जाता है । इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर ये प्रदर्शित करती है कि वह भाई की हमेशा रक्षा व मदद करेगी, उसके बदले में भाई भी अपनी बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन देता है।

वैसे तो रक्षाबन्धन के त्यौहार को लेकर तमाम कथाएं प्रचलित हैं । लेकिन अधिकतर लोग मानते है कि एक बार देवताओं और राक्षसों के मध्य भयंकर युद्ध हुआ । धीरे धीरे देवताओं का बल घटने लगा और ऐसा आभास होने लगा कि देवता युद्ध में हार जाएंगे । इसको लेकर देवता चिंतित हो उठे और सबसे ज्यादा चिंता देवताओं के राजा इंद्र हो हुई। देवताओं के गुरु बृहस्पति ने जब इंद्र को चिंतित देखा तो उन्होंने इंद्र के हाथ पर एक रक्षा सूत्र बांधा । इस रक्षा सूत्र का प्रभाव इतना हुआ कि देवता युद्ध जीत गए। तबसे यह त्यौहार अस्तित्व में आया ।

इसके साथ ही एक कथा प्रचलित है कि जब दानवीर राजा बलि की महत्त्वाकांक्षा बढ़ी और वह स्वर्गाधिपति का स्वप्न देखने लगा । इस संकट से सभी को निकालने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और बलि से तीन पग भूमि तप हेतु मांगी । तीन पग में श्री विष्णु ने सम्पूर्ण त्रिलोक सहित बलि की देह भी नाप ली । बलि की दानशीलता से प्रसन्न भगवान ने उससे वर मांगने को कहा । इस पर उसने याचना में उन्हें अपने घर में ही रख लिया । माता लक्ष्मी ने बलि के हाथ में सूत्र बांधते हुए उसे अपना भाई बनाया तथा अपने पति को मांग लिया । इसके बाद से ही यह पर्व भाई बहन के प्रेम को प्रकट करते हुए मनाया जाता है । यह त्यौहार भाई व बहन के बीच के सम्बन्ध को दृढ़ बनाता है।