गम्भीर विषय– नरेन्द्र मोदी को पुन: सत्ता में लाने का औचित्य?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


देशवासी इस विषय पर गम्भीरतापूर्वक विचार करें :– यदि नरेन्द्र मोदी वर्ष २०१४ में चुनाव-पूर्व देश की जनता को दिखाये मीठे सपनों को अपने निर्धारित कार्यकाल में पूरा नहीं कर सकेे और उसके बाद भी उनको दूसरा मौक़ा देश की जनता देना चाहे तो सबसे पहले देशवासी अपने घर में ‘एल्युमीनियम का एक कटोरा’ ख़रीद कर रख लें; वर्तमान सरकार नितान्त निर्दय है; वह सत्ता पाने के लिए देश के राष्ट्रवाद का गला भी घोंट सकती है।

नरेन्द्र मोदी का ‘विकल्प’ पूछनेवालों और ‘नोटा’ का विरोध करनेवालों से चुनौती प्रस्तुत करते हुए, मैं प्रश्न कर रहा हूँ; साहस हो तो प्रासंगिक उत्तर दीजिए :—
१- आपके अनुसार भाजपा घोषित हिन्दूवादी पार्टी है तो हिन्दुओं को आपस में क्यों लड़वा रही है?
२- आठ राज्यों में हिन्दू ‘अल्पसंख्यक’ हैं। ऐसे में, ‘हिन्दू अल्पसंख्यक आयोग’ का गठन अब तक क्यों नहीं किया जा सका?
३- कश्मीर घाटी में नारकीय जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डितों के लिए इस पार्टी ने पिछले चार वर्षों में क्या-क्या किया है?
४- ‘हिन्दुओं’ की भावनाओं के साथ ज़ुम्लेबाज़ प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी कब तक खिलवाड़ करते रहेंगे?
५- चुनाव-पूर्व तथाकथित हिन्दूवादी पार्टी-द्वारा सार्वजनिक किये गये ‘संकल्पपत्र’ में किये गये वायदे अब तक पूरे क्यों नहीं किये जा चुके हैं?
६- प्रधानमन्त्री दुनियाभर घूमते रहे; परन्तु हिन्दुओं के आस्था-केन्द्र ‘अयोध्या’ क्यों नहीं गये?
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १९ सितम्बर, २०१८ ईसवी)