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प्रश्नपत्रों को ‘लीक’ करानेवाले मनबढ़ क्यों हैं दिखते?

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

ज्वलन्त ०——-

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

हमारे विद्यार्थियों के साथ मुलायम-सरकार से लेकर योगी-सरकार तक लगभग पच्चीस परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षाओं से पूर्व सार्वजनिक होते आ रहे हैं। इसका कारण क्या है? यदि अपराधियों को पकड़ा गया था और दण्डित किया गया था तो अगले किसी व्यक्ति अथवा ऐसे कुकृत्य करनेवालों के ‘गैंग’ का साहस कैसे हो जाता है?

स्पष्ट हो जाता है कि जिन नाम और चेहरों की सत्तारुढ़ दलों में गहरी पैठ रही है, जिन्हें ‘बड़ी मछलियाँ’ कहा जाता है, उनके प्रति कथित सरकारें ‘मुलायम’ बनी रहीं और ‘योगनिद्रा’ में बनी रहीं।

आज, जब उत्तरप्रदेश के विधानसभा-चुनाव कराये जाने में लगभग दो माह रह गये हैं तब कल (२८ नवम्बर) ‘यू० पी० टी० ई० टी०’ (उत्तरप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा २०२१) के प्रश्नपत्रों के सभी प्रश्न परीक्षा से पूर्व ही सार्वजनिक कर दिये गये थे; यानी प्रश्नपत्र ‘लीक’ कर दिये गये थे, परिणामत: और प्रभावत: योगी-शासन ने दोनों पालियों की परीक्षाओं को निरस्त करने की घोषणा कर दी है; अपराधियों पर ‘गैंगेस्टर एक्ट’ के अन्तर्गत काररवाई कराने के लिए निर्देश भी कर दिया है। ऐसे में, पुन: प्रश्न है, इस प्रकार की कलुषित घटनाओं में संलिप्त जिन अपराधियों को दबोचा गया था, क्या उनके विरुद्ध भी ‘गैंगेस्टर एक्ट’ लगाकर उनकी सम्पत्ति कुर्क की जायेगी या फिर सब कुछ पहले-जैसा “ख़ाली डिब्बा-ख़ाली बोतल” सिद्ध होगा?

हम यदि योगी आदित्यनाथ की शासनावधि (वर्ष २०१७ से अब तक) में ‘पेपर लीक’ पर विचार करते हैं तब ज्ञात होता है कि अब तक लगभग १० परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षाओं से पूर्व ‘लीक’ कराये गये हैं; किन्तु ‘नक़्ल माफ़ियाओं’ पर अभी तक शिकंजा कसने में योगी-सरकार विफल रही है। यह भी सच है कि ऐसे कुकृत्य कर, हमारे विद्यार्थियों की उनके तन-मन-धन के स्तर पर बहुत ही क्षति पहुँचायी गयी है। ऐसा नहीं कि योगी-सरकार इसे जानती नहीं है; वह तो हर क्षेत्र के अपराधियों की चड्ढी के अन्दर की सारी बातें सूँघकर उनके चरित्र की पटकथा लिखने में समर्थ है; किन्तु किसके जघनवस्त्र (चड्ढी) को सूँघकर दण्डित कराना है और किसकी बिना सूँघे ‘क्लीन चीट’ दे देनी है, हमें इस आचरण की सभ्यता से वर्तमान सरकार अनुभव कराती आ रही है।

उल्लेखनीय है कि लगभग २१ लाख परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ क्रूर उपहास करके योगी-सरकार के परीक्षा-नियामकों ने अपने चेहरे पर कालिख़ पोतवा (‘पुतवा’ अनुपयुक्त है।) ली है। जिन २९ आरोपितों को गिरिफ़्तार किया गया है, क्या उनमें घटना का सरगना शामिल है? योगी-सरकार पत्तों को सींचने में माहिर है। यही कारण है कि ‘पेपर लीक’ की घटनाएँ थमती नज़र नहीं आ रही हैं।

हमारे लाखों विद्यार्थियों का अपने निवास अथवा आवास से दूर-दराज़ के परीक्षा-केन्द्रों में पहुँचना; अधिकतर महिला अभ्यर्थियों के साथ उनके माता-पिता और अभिभावकगण का अपने कामों को छोड़कर पहुँचना, क्या उनकी कठिनाइयों के प्रति सरकार संवेदनशील दिख रही है? बेशक,नहीं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ नवम्बर, २०२१ ईसवी।)