मध्यप्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होते रहे और शासन-प्रशासन सोता रहा!..?

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

लज्जा का विषय है कि मध्यप्रदेश बोर्ड की दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं के शुरू होने के एक दिन पहले ही सभी प्रश्नपत्र ‘लीक’ करा लिये जा रहे हैं। गत १ मार्च को १०वीं की हिन्दी का प्रथम प्रश्नपत्र विद्यार्थियों को एक दिन पहले ही उपलब्ध करा दिया गया था। यही स्थिति ११ मार्च को देखी गयी थी, जब १०वीं की गणित का प्रश्नपत्र भी परीक्षा से पूर्व सार्वजनिक किया जा चुका था। यह घृणित सिलसिला यहीं तक नहीं बना रहा। १४ मार्च को १०वीं के संस्कृत-विषय का प्रश्नपत्र भी परीक्षा-प्रारम्भ होने से १ घण्टा-पूर्व ही सार्वजनिक किया जा चुका था।

इस घृणित खेल के अन्तर्गत उक्त बोर्ड की बारहवीं कक्षा के प्रश्नपत्र भी एक दिन पहले ‘मुक्त मीडिया’ (सोसल मीडिया) के माध्यम से सार्वजनिक किये गये थे। हिन्दी, अँगरेज़ी तथा जीवविज्ञान के १२वीं के प्रश्नपत्र भी ‘लीक’ कर दिये गये थे।

उल्लेखनीय है कि ये सभी प्रश्नपत्र परीक्षा-शुरू कराये जाने से एक दिन-पूर्व प्रतिप्रश्नपत्र ३०० रुपये मे बेचे जाते रहे, जबकि बताया गया है कि सभी प्रश्नपत्र सम्बन्धित परीक्षा-केन्द्रों के निकटतम थानो मे तालाबन्द पेटियों मे सील पैक करके रखे गये हैं, जहाँ से प्रश्नपत्र को परीक्षा के शुरू होने के १ घण्टा पहले ही क्षेत्रीय तहसीलदार, पुलिस-अधिकारी, मध्यप्रदेश बोर्ड-द्वारा अधिकृत परीक्षाकेन्द्र-अधिकारी तथा सम्बन्धित विद्यालय के अध्यापकों की उपस्थिति मे निकालकर, परीक्षा-केन्द्र को उपलब्ध कराये जाते रहे हैं।

अब प्रश्न है, जब इतनी कड़ी देखरेख मे प्रश्नपत्रों के रखरखाव की व्यवस्था है तब ‘फ़ोनपे’ और ‘क्यू०आर० कोड’-माध्यम से भुगतान कराकर, प्रश्नपत्र परीक्षा-शुरू होने के एक दिन-पूर्व सार्वजनिक कैसे होते रहे? मध्यप्रदेश की पुलिस-व्यवस्था पक्षाघात से ग्रस्त कैसे हो गयी? ऐसे मे, मध्यप्रदेश-पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का अकर्मण्य चरित्र कलंकित हो चुका है। हमे नहीं भूलना चाहिए कि कुछ वर्षों-पूर्व ‘मध्यप्रदेश व्यापमं’ का घोटाला-काण्ड एक बेहद घिनौना कुकृत्य था, जिसमे वहाँ की भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार का हाथ था, जिसे दबा दिया गया।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १५ मार्च, २०२३ ईसवी।)