
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
बैंक-खाते को ‘आधार कार्ड’ से जोड़ने की अनिवार्य व्यवस्था कराकर, देश की सरकार बच्चों के भी ब्याज में सेंधमारी करा रही है। ‘१५ जी’ फॉर्म को भरने के बाद भी बच्चों की ‘सावधि जमा-योजना’ के अन्तर्गत जमा की गयी धनराशि’ से प्राप्त ब्याज में भी सरकार “डंके की चोट पर” डक़ैती करा रही है और बैंककर्मी तथाकथित ‘मोदी-सरकार की नयी बैंकिंग नीति’ को इसके लिए ज़िम्मेदार बताकर, इस सेंधमारी से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार की ऐसी बैंकिंग नीति, जिसके अन्तर्गत अपने माता-पिता अथवा अभिभावक पर आश्रित बच्चों को ‘आयकर’ देने के लिए बाध्य किया गया है, को ‘भारत के बैंकिंग इतिहास में ‘अनोखी घटना’ और ‘बीभत्स सरकारी फ़ैसले’ के रूप में देखा जा सकता है।
यह ऐसी बेईमान और घिनौनी सरकार है, जो उद्योगपतियों/कॉरपोरेट घरानों पर सीमातीत मेहरबान है और मध्यम-निम्न वर्गों की जनता की कमर तोड़ने के लिए सारी हदें पार करती जा रही है। जनसामान्य के लिए नितान्त घातक सरकार की नीति है : देशवासियों को आर्थिक स्तर पर इतना कमज़ोर कर दो कि जनविरोधी फ़ैसले के विरुद्ध वे अपनी गरदन तक न उठा सकें।
अब भी देश की जनता जाग्रत नहीं हुई तब यह आततायी सरकार जन-जन को जीने नहीं देगी।
आँखें खोलो; सबक़ लो और इस निर्मम सरकार को उखाड़ फेंको।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २८ जनवरी, २०१८ ई०)