संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

समय के सम्मुख हम कितने ‘बौने’ हैं!

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

निवर्तमान न्यायाधीश, जो कभी स्वयं न्यायाधीश के आसन पर बैठकर ‘न्यायगाथा’ लिखा करते थे, उनके साथ समय ने एक ऐसा ‘क्रूर छल’ किया है, जो हमारे मन-प्राण को भीतर तक ‘सिहरन’ दे रहा है; आन्दोलित कर दिया है।

हमारे ‘मुक्त मीडिया’ के जीवन्त सदस्य, शब्दबाण चलाने में निपुण सारस्वत मित्र तथा ‘न्यायपूजक’ श्रद्धेय सुरेश सिंह यादव जी (आगरा) को आज (२ मई) कोरोना ने अपने क्रूर पंजों में हमेशा के लिए निर्ममतापूर्वक दबा लिया है।

एक निर्भीक-निडर शब्दधर्मी की लेखनी हर मोड़ पर अविचलित रहकर ‘व्यवस्था के अत्याचार’ के विरोध में आग उगलती रहती थी। व्यंग्य-व्यंजना का जब वे मारक प्रहार करते थे तब उनका ‘सत्यमय दर्शन’ आलोकित हो उठता था।

विश्वास हो भी तो कैसे? तीन-चार दिनों-पूर्व उनकी सक्रियता लक्षित होती रही और दो दिनों के भीतर ही वह गतिशीलता सदैव के लिए थम गयी। उनकी भतीजी, शिक्षिका तथा कुशल रचनाधर्मिणी प्रियवर राजश्री यादव जी से कुछ समय-पूर्व जीवन के परम सत्य के साथ साक्षात् करने के उद्देश्य से सम्पर्क किया था तब क्रन्दन, फफकन तथा सिसकियों ने ‘मृत्यु का भेद’ अनावृत कर दिया था।

अपने सहृदय मित्र को परम गति की प्राप्ति हो, कामना है।