★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
कल (२५ अक्तूबर) उ० प्र० पी० सी० एस० (प्रा०) परीक्षा : २०२१ आयोजित की गयी थी। सामान्य हिन्दीप्रश्नपत्र कैसे तैयार किया जाता है, इसकी बिलकुल समझ नहीं दिखी। मैं अतिशीघ्र ‘उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग’ की अकर्मण्य और निकृष्ट व्यवस्था के अन्तर्गत परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ किये जानेवाले क्रूर उपहास को सार्वजनिक करूँगा। सामान्य हिन्दी-विषय के प्राश्निक (प्रश्नपत्र तैयार करनेवाला) को प्रश्नपत्र कैसे तैयार किया जाता है, एक प्रतिशत की भी समझ नहीं है; क्योंकि उसका अध्ययन ही नहीं है। वह या तो आरक्षण का लाभ प्राप्त करके अध्यापक-प्राध्यापक बन गया होगा या फिर राजनेताओं की अनुकम्पा पाकर, रिश्वत देकर अध्यापक-प्राध्यापक बना दिया गया होगा अथवा इलाहाबाद विश्वविद्यालय का अवकाश-प्राप्त वह प्राध्यापक होगा, जो इधर-उधर मुँह मारकर, उपर्युक्त आयोग के अधिकारियों का कृपापात्र बनता आ रहा होगा।
बहरहाल, स्थिति अब विस्फोटक हो चुकी है; क्योंकि इस विषय पर यथावसर मैं सम्बन्धित आयोगों आदिक का ध्यान आकृष्ट करता आ रहा हूँ, जो निष्प्रभावी दिखता आ रहा है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ अक्तूबर, २०२१ ईसवी।)