समाजवादी प्रवक्ता के तीखे आरोपों प्रत्यारोपों के बाद नगरपालिका अध्यक्ष सुखसागर मिश्रा ‘मधुर’ ने जवाबी हमला बोला। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के प्रति अगर एक शब्द कहा गया तो ईट से ईट बजा देंगे।
उन्होंने सपाइयों पर तंज कसते हुए कहा कि जिस पार्टी कार्यालय में बैठकर वार्ता करते हैं, उस कार्यालय का निर्माण, सुंदरीकरण पूर्व सांसद के ही द्वारा कराया गया। उस पर लाखों रुपया किराया बाकी था जिसे जमा कराया गया। उन्होंने नसीहत दी कि मतभेद पार्टी व नेताओं के बीच होते हैं इसलिए मर्यादा ना तोड़ें, अपनी हद में रहें। उन्होंने पूर्व सांसद का क़द याद दिलाते हुए कहा कि नरेश अगवाल राष्ट्रीय नेता हैं और राज्यसभा कार्यकाल के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी की पैरवी बहुत मज़बूती के साथ की है। समाजवादी पार्टी को बचाने एवं साइकिल चुनाव चिन्ह दिलाने में एड़ी से चोटी तक का ज़ोर लगा दिया। अगर वे ना होते तो सपा का नामो निशान मिट जाता। इसके बाद ख़ुद सवाल दागते हुए कहा कि इतना सब करने के बाद भी समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा का टिकट काट दिया, यह समाजवादी पार्टी के नेताओं की गद्दारी नहीं तो क्या है।
उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि पीठ में छुरा तो अखिलेश यादव व समाजवादी पार्टी ने मारा है। जब अखिलेश यादव का साथ नेता जी और उनके चाचा ने छोड़ दिया तो भी उस स्थिति में नरेश अग्रवाल ने उनका साथ दिया। जब अखिलेश यादव अपने पिता के नहीं हुए तो किसी के नहीं हो सकते। उन्होंने फ़िर सवाल दागा कि राष्ट्रीय नेता की तुलना फिल्मी कलाकारों से करना कहां तक उचित है? चेतावनी के लहज़े में उन्होंने कहा कि पूर्व सांसद के कार्यकर्ता उस समय चुप रह गए, क्योंकि इसके लिए नरेश जी ने रोका था कि कोई कार्यवाही ना करना। वरना उसी समय पुतला फूंकने की बात तो अलग बहुत कड़ा निर्णय होता। अगर समाजवादी पार्टी के नेता व कार्यकर्ताओं ने कोई कदम उठाया तो परिणाम भयंकर होंगे। बहुत ही तीखे लहज़े में उन्होंने कहा कि नरेश अग्रवाल को नसीहत देने वाले अपनी हद में रहें, वक्ता के पद पर पहुंचने का मतलब ये नहीं कि राष्ट्रीय नेता हो गए। सीमाओं और मर्यादाओं का उल्लंघन ना करें।कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राम प्रकाश शुक्ला, अमित बाजपेई, अमित त्रिवेदी ‘रानू’, अंकित अवस्थी आदि मौजूद रहे।