★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
तृतीय विश्व-युद्ध पर्दे से बाहर आने के लिए बेचैन दिख रहा है, अब इससे इंकार नहीं किया जा सकता। इसमे दो मत नहीं कि रूस अब चारों ओर से घिर चुका है। इसका एकमात्र कारण है, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की आवश्यकता से अधिक हठधर्मिता। सत्ताईस दिन हो चुके हैं; न तो रूस पीछे हटने को तैयार है और न ही युक्रेन आत्मसमर्पण करने के लिए। रूस अपने अत्यधिक घातक हथियारों का प्रयोग करता आ रहा है और उसी तेज़ी के साथ युक्रेन भी जवाब देता आ रहा है। पुतिन युक्रेन की संस्कृति को मिटाना चाहता है; उसके अस्तित्व को समाप्त कर अपनी नीतियाँ थोपना चाहता है। युक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को मालूम है कि पुतिन उसकी सम्प्रभुता के साथ बलप्रयोग कर रहा है। यही युद्ध का मूल कारण है। रूसी वायुसेना की बारूदी बौछार से अधिकांश युक्रेन खण्डहर मे बदल चुका है। इतना सब घटने के बाद भी युक्रेन के राष्ट्रवादी राष्ट्रपति जेलेंस्की हिमालय की तरह से खड़े दिख रहे हैं। युक्रेन का आरोप है कि रूसी सेना ने डोनबास से उसके २,३८९ बच्चों का अपहरण कर लिया है; उसके खाद्य गोदाम मे हमला कर प्रचुर मात्रा मे खाद्यान्न लूट लिये गये हैं; रूसी सेना बाज़ार, मॉल, शिक्षण-संस्थान, चिकित्सालय, रिहायशी क्षेत्रों पर बम बरसा रहे हैं। जिन स्थानो पर युक्रेनी जनता ने शरण ले रखी है, उसे पुतिन के सैनिक नष्ट करते जा रहे हैं। यही कारण है कि अभी तक लगभग ९२५ युक्रेनी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमे से बड़ी संख्या मे बच्चे और महिलाएँ शामिल हैं। पुतिन के सैनिक पूरी तरह से युद्ध-अनुशासन के विपरीत हथियारों से रिहायशी इलाक़ों मे बम गिरा रहे हैं; राकेट दाग़ रहे हैं; मिसाइल से हमला कर रहे हैं। इतना ही नहीं युक्रेन ने रूस पर आरोप लगाया है कि वह युक्रेन पर प्रतिबन्धित फास्फ़ोरस बम का विस्फोट करा रहा है। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि रूसी सेना जैविक हथियारों का प्रयोग कर सकता है। पुतिन को एहसास हो चुका है कि उसका अतिवाद तृतीय विश्वयुद्ध का कारण बन सकता है। यही कारण है कि वह अब अत्यधिक घातक हथियारों से अति तीव्रतापूर्वक युक्रेन को ध्वस्त कर, वहाँ अपना झण्डा लहराकर तृतीय विश्वयुद्ध की किसी भी सम्भावना को समाप्त करना चाहता है। रूस ने सुपर सोनिक, बैलिस्टिक मिसाइल से युक्रेन की भरपूर क्षति की है। इतना ही नहीं, वह बेला रूस और चेचेन्या के लड़ाकुओं का भी सहयोग ले रहा है। उसके सैनिक विरोध कर रहे निहत्थे युक्रेनवासियों को निर्ममतापूर्वक मार-पीट रहे हैं। पुतिन को यह भी मालूम हो चुका है कि रूस की भी कम क्षति नहीं हुई है। युक्रेनी सैनिक अब तक लगभग १७ हज़ार सैनिकों को मार चुके हैं; हज़ारों की संख्या मे उसकी बख़्तरबन्द गाड़ियाँ, युद्धक विमान, द्रोन, हेलीकॉप्टर, मिसाइल, टैंक आदिक को ध्वस्त कर दिये हैं। अब रूसी सेना युक्रेन को सामरिक सहायता देनेवाले देश पोलैण्ड पर आक्रमण करने की तैयारी कर चुकी है। वह अब पोलैण्ड की ओर बढ़ चुकी है। रूसी बमवर्षक विमान पोलैण्ड के ‘एअरस्पेस’ मे पहुँच चुके हैं। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन २५ मार्च को पोलैण्ड के राष्ट्रपति आन्द्रे डुडा से मिलने जायेंगे। उससे पूर्व वे २४ मार्च को नाटो के महाकार्यालय जायेंगे। इतना ही नहीं, जो बाइडेन युक्रेन मे भी आकस्मिक रूप से पहुँच सकते हैं। ग्रेट ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री बोरिस जॉन्सन भी युक्रेन जा सकते हैं। वे अपने स्तर से युक्रेन की सामरिक सहायता करते आ रहे हैं। बहरहाल, विश्व-महाशक्ति मे से एक संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन अब रूस को चेतावनी देते नज़र आ रहे हैं, जिसका परिणाम और प्रभाव ‘विश्वयुद्ध’ का वातावरण बनाता हुआ दृष्टिगत हो रहा है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन की हठधर्मिता और अतिवादिता से उसकी ही सेना के अधिकारी और सैनिक तंग आ चुके हैं। रूसी नागरिक भी पुतिन का विरोध कर रहे हैं। यही कारण है कि अब पुतिन को ‘विष’ देकर मारने की नीति तैयार कर ली गयी है। उसे विष देनेवाला किसी बाहरी देश का व्यक्ति नहीं होगा, बल्कि उसके ही देश से वैसा कृत्य करनेवाला ‘दुर्दान्त’ व्यक्ति होगा। यही कारण है कि पुतिन ने हाल ही मे अपने १,००० सैनिकों और उसके व्यक्तिगत लोग को हटाया जा चुका है, जिनमे पुतिन का अंगरक्षक, सैन्य कमाण्डर, उसके कपड़े धोनेवाला व्यक्ति भी हटाये जा चुके हैं। दूसरी ओर, पुतिन ने जेलेंस्की की हत्या के लिए ‘वैगनर ग्रुप’ को दायित्व सौंपा गया है। इससे पहले भी जेलेंस्की की हत्या करने की कई बार योजनाएँ बनायी गयी थीं, जिन्हें युक्रेनी सैनिकों ने विफल कर दिये थे। ब्लादिमीर जेलेंस्की भी अपनी स्थिति बदलते जा रहे हैं। जो बाइडेन ने ब्रिटिश कमाण्डो एअरलिफ़्ट को जेलेंस्की की सुरक्षा का दायित्व सौंपा है।
ख़बरें छन-छन कर आ रही हैं कि रूस अपनी मनबढ़-नीति के कारण युक्रेन पर परमाणु शक्ति का प्रयोग करना चाहता है। ‘नाटो’ (नॉर्थ एटलाण्टिक ट्रिटी ऑर्गनाइज़ेशन)-देश भी भाँप चुके हैं कि पुतिन सीमा से बाहर आ चुका है और उस पर नकेल कसना बहुत ज़रूरी हो चुका है। फ्रेंच-मूल के नाटो-जनरल ने सुस्पष्ट कर दिया है– हम युक्रेन के बेगुनाहों की हत्या बरदाश्त नहीं कर सकते। हम उनकी रक्षा के लिए रूसी सेना पर मिसाइल से हमला करेंगे। नाटो-देशों मे से जो सबसे अधिक चिन्तित देश है, वह ग्रेट ब्रिटेन है। इसका कारण यह है कि ग्रेट ब्रिटेन ने युक्रेन की बढ़-चढ़कर सामरिक सहायता की है, जिसके कारण रूस का राष्ट्रपति पुतिन बौखलाया हुआ है। ग्रेट ब्रिटेन को मालूम है कि रूस यदि किसी पर सबसे पहले आक्रमण करेगा तो वह ग्रेट ब्रिटेन ही है, इसीलिए ग्रेट ब्रिटेन का परमाणु हथियार नेवी डीपो तक पहुँचाया जा चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से युक्रेन को ‘एअर सिस्टम’ दिया गया है। अब ‘नाटो’ ने अपनी कमर कस ली है और वह युक्रेन की ‘ढाल’ बनने के लिए तत्पर हो चुका है। यही कारण है कि पुतिन की ओर से गम्भीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देने के बाद भी उसने युक्रेन मे ‘शान्तिरक्षक सेना’ (पी० के० एफ०– पीस कीपिंग फोर्स) भेजने का निर्णय किया है।
हमे पुतिन की उस चेतावनी को भी नज़रअन्दाज़ नहीं करना होगा, जिसमे उसने कहा था– यदि ‘नाटो’ युक्रेन की मदद करेगा तो ‘विश्वयुद्ध’ निश्चित है।
युक्रेन शुरू से अब तक अकेले लड़ रहा है, जिसे लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा नाटो की रणनीति की निन्दा की जा रही है। ऐसा इसलिए कि उनमे से कोई भी देश सामने से आकर युक्रेन का साथ नहीं दे रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि उपर्युक्त शक्तिसम्पन्न देश और संघटन ‘तृतीय विश्वयुद्ध’ की सम्भावना के लिए ‘कारण’ नहीं बनना चाहते हैं।
स्थिति की गम्भीरता को समझते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने २५ मार्च को यूरोपीय देश मे जाने का निर्णय किया है। इससे ३० देशों की शक्ति जो बाइडेन के साथ आ जुड़ेंगी। वे वहाँ के देशों को अपने विश्वास मे लेकर पुतिन के विरोध मे एक कुशल रणनीति बनायेंगे, जिससे कि रूस को चारों ओर से घेरा जा सके। यूरोपीय संघ के देश भी परमाणु-शक्ति से युक्त हैं, इसलिए वे हाथों मे ‘मेहँदी’ लगाकर नहीं बैठे हैं। सभी ३० देश समझ चुके हैं कि पुतिन अपनी प्रेमिका-सहित बेटियों को स्विट़ज़रलैण्ड के बेहद सुरक्षित क्षेत्र मे पहुँचवा चुका है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि पुतिन के दिमाग़ मे युक्रेन पर परमाणु-हमला की भी योजना चल रही है।
यदि तृतीय विश्वयुद्ध छिड़ता है तो करोड़ों लोग अपने जीवन से हाथ धो बैठेंगे, इसे आसानी से समझा जा सकता है।
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लेखक भाषाविज्ञानी, समीक्षक तथा राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय विषय-विश्लेषक हैं।
सम्पर्क– ९९१९०२३८७०
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ मार्च, २०२२ ईसवी।)