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प्रो० सुरेशचन्द्र द्विवेदी एक मिलनसार साहित्यकार थे

स्मृति-शेष प्रो० सुरेशचन्द्र द्विवेदी

आज (१४ मई) ‘सर्जनपीठ’ और ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ (प्रयागराज) के संयुक्त तत्त्वावधान में एक आन्तर्जालिक (ऑन-लाइन) शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व-अँगरेज़ी-विभागाध्यक्ष और हिन्दी-अँगरेज़ी-भोजपुरी के कवि प्रो० सुरेशचन्द्र द्विवेदी के आकस्मिक निधन पर एक शोकसभा आयोजित की गयी।

‘सर्जनपीठ’ की ओर से आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया, “प्रो० द्विवेदी मेरे सम्पर्क में अस्सी के दशक में आये थे। वर्ष १९९१ में देवघर (बिहार) में आयोजित एक राष्ट्रीय समारोह में उन्हें ‘जॉर्ज ग्रियर्सन सम्मान’ और मुझे ‘राहुल सांकृत्यायन सम्मान’ से आभूषित किया गया था। वे ‘वर्ल्ड पोइट्री’ के सम्पादन और लेखन से भी जुड़े हुए थे।”

साहित्यकार डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने कहा, “प्रो० द्विवेदी एक मिलनसार और प्रबुद्ध साहित्यकार थे। वे हमारी संस्था के एक प्रमुख स्तम्भ थे।” सहायक प्राध्यापक और समाजशास्त्री डॉ० रवि मिश्र ने कहा, “प्रो० द्विवेदी की देश-देशान्तर में प्रतिष्ठा थी। वे हमारे आयोजनों में आकर हमें विश्व-साहित्य से परिचित कराते थे। भोजपुरी के प्रति उनका विशेष लगाव था।” साहित्यकार डॉ० दयाराम मौर्य ने कहा, “डॉ० द्विवेदी अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे।” कवि केशव सक्सेना ने कहा, “डॉ० द्विवेदी एक व्यावहारिक व्यक्ति थे।”

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