सोनू सूद! क्या तुम समाज की बुराइयों को मिटा पाओगे ?

सोनू सूद – क्या तुम समाज की बुराइयों को मिटा पाओगे ?

सोनू सूद क्या तुम समाज में फैली हर एक बुराई को मिटा पाओगे ,
या फिर तुम भी दो-चार दिन के मसीहा बन और के जैसा ही गायब हो जाओगे ।
आज पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगार घूम रहा है ,
अंगूठा छाप मंत्री का वंशज हीं फिर से देश का मंत्री और प्रधानमंत्री बन रहा है ।
हमारा संविधान तो कहता है कि प्रजातंत्र का शासन देश में चल रहा है ,
लेकिन यहां तो प्रजातंत्र होते हुए भी तानाशाही का राज चल रहा है ।
क्या तुम शिक्षित व्यक्ति का परीक्षण कर देश का योग्य नेता बनाओगे ,
या फिर तुम भी राजनीति में आकर राजनीति कराओगे।

सोनू सूद क्या तुम समाज मैं फैली हर एक बुराई को मिटाओगे ,
या फिर तुम भी दो-चार दिन के मसीहा बन औरों के जैसा ही गायब हो जाओगे ।

कोई खुद को बेच रहा है तो कोई किसी को खरीद रहा है ,
जनता का ख्याल कहां किसी को यहां तो हर कोई अपना महल बना रहा है ।
कोई खुद को चाचा तो कोई मामा बता रहा है ,
देश को जाति और धर्म के मजहब पर लड़ा रहा ।
क्या तुम जाति धर्म की इस लड़ाई को हमेशा के लिए मिटाओगे ,
या फिर तुम भी औरों के जैसा ही जातिगत आरक्षण की बात बताओगे ।

सोनू सूद क्या तुम समाज में फैली हर एक बुराई को मिटाओगे ,
या फिर तुम भी दो-चार दिन की मसीहा बना औरों के जैसा ही गायब हो जाओगे ।जो किसान देश को चला रहा है वही आज भूखा सो रहा है ,
इस महामारी से तंग सारा परिवार जहर खाकर सो रहा है ।
हमारी मीडिया भी सच को छुपा कर अपनी टीआरपी बढ़ा रहा है ,
जो अकाल मृत्यु है उसको भी खुदकुशी बता रहा है ।
क्या तुम लोगों में इंसानियत को जिंदा रख पाओगे ,
या फिर तुम भी नरभक्षी बनकर हम गरीबों को खाओगे

सोनू सूद क्या तुम समाज में फैली हर एक बुराई को मिटाओगे,
या फिर तुम भी दो-चार दिन के मसीहा वन औरों के जैसा ही गायब हो जाओगे ।

जिसने खुद की बहन बेटी को नहीं बख्शा वही बेटी बचाओ का ज्ञान दे रहा है ,
और इनके ही महलों में अब 7 और 9 साल की बेटियों का भी बलात्कार हो रहा है ।
अब बेटियां कैद हो रही हैं घर के बंद दीवारों में ,
अपने सपनों का दफन कर रहे हैं खुद को इन दरिंदों से बचाने में ।
क्या तुम हर एक दरिंदों को सजा दिला इनके सपनों को साकार बना पाओगे ,
या फिर तुम भी आसाराम और राम रहीम बन जाओगे।सोनू सूद क्या तुम समाज की हर एक बुराई को मिटाओगे ,
या फिर तुम भी दो-चार दिन के मसीहा बन औरों के जैसा ही गायब हो जाओगे ।

जिसके पास केवल काला धन ही है वह काले धन को निकलवाने की बात कर रहे हैं ,
जब पूरा देश महामारी में मर रहा है तब नए संसद भवन का निर्माण कर रहे हैं ।
देश का ख्याल कहां है किसी को यहां तो हर कोई अपनी तिजोरी भर रहे हैं ,
और जो नेता कर रहा था अभी तक मन की बात वही नेता बुलेट ट्रेन का सौदा कर रहा है ।
क्या तुम प्रधानमंत्री बन देश में हर एक भ्रष्टाचार को मिटाओगे ,
या फिर तुम भी राजनीति में आकर मोदी से हाथ मिलाओगे ।
सोनू सूद क्या तुम समाज की हर एक बुराई को मिटाओगे ,
या फिर तुम भी दो-चार दिन के मसीहा बन औरों के जैसा ही गायब हो जाओगे ।

प्रांशुल त्रिपाठी
विधि छात्र, सतना, हिनौती, मध्यप्रदेश