विद्यार्थियों को वाचन और लेखन के प्रति जागरूक रहना होगा– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ

"हमारे विद्यार्थी यदि मौखिक और लिखित परीक्षाओं मे शुद्ध वाचन और लेखन के प्रति जागरूक रहेंगे तो उन्हें उत्तम कोटि की सफलता प्राप्त होगी; क्योंकि प्राय: देखा गया है कि शुद्ध और उपयुक्त शब्द-व्यवहार के अभाव मे छात्र-छात्राओं को सफलता से वंचित रहना पड़ता है।''
 
गत ३ मई को 'अभिषेक एकेडमी' संस्थान', टैगोर टाउन, प्रयागराज की ओर से आयोजित टी० जी० टी०, पी० जी० टी० तथा अन्य प्रतियोगितात्मक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों को व्याकरण के सर्वांग परीक्षोपयोगी विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए, भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने एक छात्रा के 'स्त्री-विमर्श' के अवधारणा-विषयक प्रश्न का सोदाहरण उत्तर देने के अनन्तर उपर्युक्त विचार प्रकट किया था। बताया,

'साक्षात्कार की तैयारी कैसे करें' विषय पर उन्होंने अभ्यर्थियों को शालीनतापूर्वक प्रासंगिक उत्तर देने, साक्षात्कार-मण्डल से प्रतिप्रश्न न करने, सर-मैडम-मैम के स्थान पर 'महोदय!'-'महोदया!' का प्रयोग करने पर बल दिया था। इसके अतिरिक्त कई उदाहरणो से उन्होंने साक्षात्कार के महत्त्व को समझाया।
 
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने अपनी पाठशाला के अन्तर्गत प्रतियोगी विद्यार्थियों को वर्ण, अक्षर, शब्द, वाक्य, संधि, उपसर्ग, उपसर्ग, प्रत्यय, समानार्थी, भिन्नार्थी, अवस्था, विरामचिह्न आदिक का सम्बोध कराने के लिए शब्द-उत्पत्ति, उनकी अवधारणा तथा वाक्यों मे उनके शास्त्रीय प्रयोग को बहुविध समझाया। भाषा का अर्थ और उसकी परिव्याप्ति का संज्ञान कराने के लिए आचार्य ने अनेक दृष्टान्तों और उद्धरणो को प्रस्तुत किया। किसी भी प्रकार का वाक्य-गठन कैसे किया जाता है; व्याकरण के अंग-उपांगों का उपयोग कैसे किया जाता है, इन विषय-विन्दुओं पर सविस्तार समझाया।

उन्होंने रचनाखण्ड के अन्तर्गत 'काव्यांग' की उपयोगिता और महत्ता' पर दृष्टि-निक्षेपण करते हुए, कविता प्रस्तुत करते हुए, रस (भाव), छन्द तथा अलंकार की अवधारणा का बोध कराया। उन्होंने साहित्य की विधाएँ, पद्य, गद्य तथा उनके विषय को सुस्पष्ट करते हुए, अवधारणामूलक अभिनव प्रतिमान स्थापित किया था।
 
सभागार मे बैठीं शताधिक छात्र-छात्राओं ने आचार्य से कई प्रश्न-प्रतिप्रश्न किये थे; जिज्ञासा प्रकट किये थे, जिनके सम्यक् उत्तर और प्रशमन आचार्य ने किये थे। सभागार मे बैठे विद्यार्थियों मे सर्वाधिक जिज्ञासु छात्राएँ दिख रही थीं, जो छात्रों की तुलना मे बढ़-चढ़कर प्रश्न करती दिखीं और उत्तर पाने के बाद संतुष्ट भी।

इनके अतिरिक्त आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने छात्र-छात्राओं से कई अशुद्ध शब्द और वाक्य लिखवाकर उनसे शुद्ध करवाये थे। उन्होंने अपनी कर्मशाला मे शताधिक अशुद्ध शब्दों को कैसे शुद्ध करें, इसकी कला विकसित करते हुए, उन्हें शुद्ध शब्दों का ज्ञान कराया था।
    
आचार्य की पाठशाला से पूर्व उक्त एकेडमी की ओर से डॉ० अशोक स्वामी ने स्वागत किया। डॉ० विवेक शंकर ने विद्यार्थियों को साक्षात्कार की तैयारी करने के लिए आवश्यक अनुशासन के प्रति जाग्रत् किया। डॉ० आर० ए० मानव ने भी संबोधन किया था।

अन्त मे, एकेडमी के स्वामी अभिषेक यादव ने आभार-ज्ञापन किया।