भवानीमंडी:-संगम समाचार एजेंसी के संवाददाता ने तिनसुकिया असम में उपस्थित साहित्य संगम संस्थान के पदाधिकारी गण जो कि काव्यमेध वार्षिकोत्सव में भाग लेने भारत वर्ष के कोने कोने से पधारे, से बात की । जिसके आधार पर 2 जून 2019 को तिनसुकिया चैम्बर रोड स्थित श्री शक्ति मंदिर के हॉल में प्रांतीय तथा राष्ट्रीय पंजीकृत संस्थान “साहित्य संगम” का विराट वार्षिकोत्सव प्रांतीय शाखा असम के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
प्रांतीय अध्यक्ष श्री संजय त्रिवेदी जी , सचिव सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप” जी ,आयोजिका श्री मति इंदु शर्मा “शचि”जी, श्री साँवर मल रासीवासिया जी, माया चौबे जी, सुजाता खेतान जी,उमी जालान,ऋतु गोयल “सरगम” जी तथा समस्त तिनसुकिया शाखा के सदस्यों ने भरपूर उत्साह एवम खुशी से इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु तन, मन, धन से सहयोग किया।
साहित्य संगम संस्थान की शाखा असम द्वारा देश के पूर्वाचंल में 2 जून को तिनसुकिया में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का कवि सम्मेलन एवम् वार्षिकोत्सव आयोजित किया गया। जो साहित्य संगम संस्थान का चौथा वार्षिकोत्सव कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में जयपुर से रिखब चन्द राँका कल्पेश जी, इंदौर से वैदिक राष्ट्र के संपादक आचार्य भानु प्रताप वेदालंकार जी , खरगोन म०प्र० से कैलाश मंडलोई जी , प्रयागराज उ०प्र० से सरिता श्रीवास्तव जी , कानपुर उ०प्र० से साहित्य संगम संस्थान के अध्यक्ष श्री राज वीर सिंह मंत्र जी एवं रायगढ़ छत्तीसगढ़ से रामावतार बिंजराजका निश्छल जी , जबलपुर म. प्र. से डॉ राजलक्ष्मी शिवहरे जी, गोवाहाटी से राम प्रसाद दुबे “राम” जी भी शामिल हुए।
सभा के मुख्य अतिथि आदरणीय श्री रामावतार बिंजराजका निश्छल जी को चुना गया।
उनकी अध्यक्षता में भव्य आयोजन का शुभारंभ सुबह दस बजे से होकर शाम गये तक चला। सर्वप्रथम माननीय अतिथियों द्वारा सरस्वती जी की प्रतिमा के सामने ल दीप प्रज्ज्वलन किया गया। उसके बाद महिला सदस्यों द्वारा माँ शारदे वन्दना तथा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। आगंतुक कवियों का असम के गौरव चिन्ह को ओढ़ाकर स्वागत किया गया तथा असम के विशेष स्मृति चिन्हों से सुसज्जित कलाकृति भेंट स्वरूप प्रदान की गई। प्रथम चरण में साहित्य संगम संस्थान के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिसके अंतर्गत तिनसुकिया की ही ऋतु गोयल “सरगम” की काव्य सरगम , शाखा की प्रांतीय सचिव सुचिता अग्रवाल “सुचिसंदीप” जी की काव्य शुचिता तथा इंदु शर्मा “शचि” जी की छन्द काव्य का , साहित्य संगम संस्थान द्वारा 24 साहित्य कारों की लघु एकल काव्यसंग्रह काव्य मेघ का, साहित्य संगम संस्थान की योग शाखा की पत्रिका योग संगम का भी विमोचन किया गया। जिसमें योगसंगम से जुड़े कई रचनाकारों की रचनाएं सम्मिलित है।
असम की पृष्टभूमि पर रचित अद्वितीय साझा उपन्यास “बरनाली” जिसको साहित्य संगम संस्थान से जुड़े देश के विभिन्न राज्यों के रचनाकारों ने मिलकर लिखा, एवम् जिसकी निर्देशिका जबलपुर की उपन्यासकारा आदरणीय राजलक्ष्मी शिवहरे जी तथा प्रबंध संपादक तिनसुकिया की सुचिसंदीप “सुचिता” जी है , का लोकार्पण भी किया गया । यह तिनसुकिया के लिए गौरव की बात है कि एकमात्र साझा उपन्यास असम राज्य को समर्पित है।
साहित्य रत्न सम्मान से इक्यावन साहित्यकारों को ,योग्यता के आधार पर, तथा विद्या वाचस्पतिकी मानद उपाधि से पांच साहित्य कारों को सम्मानित किया गया । जिसमें खरगोन म०प्र० के डॉ.कैलाश मंडलोई कदंब जी , प्रयागराज उ०प्र० की डॉ सरिता श्रीवास्तव जी , लखनऊ उ० प्र० की डॉ कुमुद श्री वास्तव “कुमुदनी “ जी, जयपुर राजस्थान के डॉ रिखब चन्द राँका “कल्पेश” जी, तिनसुकिया असम की डाँ ऋतु गोयल “सरगम” जी को मांनिद उपाधि प्रदान की गई। उपस्थित सभी लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी, जिसका आयोजन संजय त्रिवेदी जी के संचालन व देखरेख में हुआ तथा सभी ने असम कार्यक्रम में 2 जून के खाने का भरपूर आनंद उठाया ।
साथ ही आदरणीय अध्यक्ष संजय त्रिवेदी जी की वैवाहिक वर्षगाँठ भी साहित्य संगम संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने मिलकर मनाई, एवं उन्हें शुभकामनाएँ व बधाई प्रेषित की। इस कार्य क्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने में योगशाला की अधीक्षिका इंदु शर्मा “शचि जी की योगदान उल्लेखनीय है ।