शिवांकित तिवारी “शिवा” युवा कवि एवं लेखक, सतना (मध्यप्रदेश)

प्रकृति को सहेजने को अब सब मिलके तैयार हो,
विनाश ना हो प्रकृति का यह प्रयास बार – बार हो,
जागो सभी बचाओ अब इस सृष्टि के आधार को,
पौधा लगाओ और बचाओ जीवन और संसार को,
पेड़ कट रहे हैं अंधाधुंध अब तेजी से चहुंओर,
जंगल करके साफ फैक्ट्रियां लगाने में दे रहे जोर,
धुआं निकल रहा है जानलेवा सांस भी लेना है दूभर,
पर्यावरण क्षरण की ओर, अब मानव जाएगा किधर,
जिंदगी में जहर घोल रहा प्रदूषण से मानव परेशान है,
जनजीवन और लोग प्रभावित जंगल खाली सुनसान है,
पर्यावरण बचाकर हमको इस जग को बचाना है,
वृक्षारोपण करके मानव जीवन को सुखी बनाना है ।