ताकि ये आपस में ही लड़कर ‘बौद्धिक गुलाम’ बने रहें…

आशीष सागर-


सभ्य लोग अब तो विलियम हंटर और मैक्स मूलर ( विलियम हंटर कमीशन ) के माध्यम से विकृत की गई मनु स्मृति भी जलाने जा रहे है । जिसमें हिन्दू धर्म / कर्म को विकृत किया गया था । अंग्रेज ये जानते थे कि अगर भारत के लोगो को बिना भटकाव के आजादी दे दी गई तो ये दुनिया के सबसे ताकतवर लोग होंगे । इन्हे, इनकी मानसिक स्थति को इतना विकृत कर दो ताकि ये आपस में ही लड़कर ‘बौद्धिक गुलाम’ बने रहें । यही इनके पिछड़ेपन का मूल होगा ।
अच्छा है जब हिंदुस्तान में मुस्लिम दलित बन जावे और दलित किताबी बुद्धजीवी तो युवा दिशा हीन तो होगा ही । मूल दलित ( दरिद्र ) तो आज तक विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर खड़ा है । गौरतलब है जो सियासी बगुले आज दलित लाबादा ओढ़े है ‘जय भीम’ के नारों से । असल में वे अरबों के स्वामी है । इसमे नेता से लेकर पूंजीपति तक है । देश को भ्रमित करने वाले इस शहरी क्रीमी दलित को पुनः भारतीय वेद पढने की आवश्यकता है जिसका जन्म हर संप्रदाय, धर्म, मजहब से पहले हुआ था । पश्चिम देश भी इस बात को मानकर आज शोध करते घूम रहे है कि जो वेदों में लिखा था वो किसने रचा था । मुस्लिम,हिन्दू,ईसाई,पारसी और आज के बौद्धिक पांडित्य / दलित का भ्रूण भी तब किसी मांस की कोख में नही आया था । सिर्फ आदिम, जंगल रहवासी, प्रकृति सहपूरक लोग थे । बड़ी बात है दुनिया में गणित, कैमस्ट्री, फीजिक्स, शून्य, खगोल संरचना, प्रकृति के अंग – नदी, पहाड़, झरने, जीव (जलचर, नभचर, वन्यजीव आदि) सूरज – चाँद तो सबने एक स्वीकार किये लेकिन मजहब और भगवान / खुदा / गॉड को बाँट लिया । तब तो सब कुछ विभाजित किया जाना चाहिए न । हर मजहब / धर्म / जाति की प्रकृति / ईको सिस्टम अलग होना चाहिए न । कहते है जब मानव पढ़ा – लिखा हो जाता है तब वो मानव नहीं विज्ञानी (विकृत ज्ञानी) बन जाता है । …वैसे भी आज भारत देश की राजनीती – पार्टीबाजी इन्ही दो पर दलित / मुस्लिम वोट की खेती पका रही है । लोकतंत्र चला रही है । गाँव के दीनू,रामू ,सुखिया तमाम दीन – असहाय इस बौद्धिक आतंकवाद को ढ़ोते हुए फटेहाल है ।
तस्वीर पन्ना टाइगर्स से प्रतीकात्मक – विकास से बेदखल ये गाँव के लोग बौद्धिक ज्ञान से दूर अदद रोजीरोटी की राह तकते है । जब ये भी किताबी ज्ञानी बन जायेंगे तब आपकी तरह विज्ञानी (विकृत ज्ञानी) होंगे । बेहतर है ये मानव बने रहे सुविधाभोगी जातीय शैतान नहीं । देश का चुना हुआ प्रधानमंत्री कथित मन की बात करता है और जनता दलित – मुस्लिम की जूतम पैजार । सिस्टम है शायद ऐसे ही चलेगा अगले गृह युद्ध तक ।