अवनीश मिश्र –
31 जनवरी को साल 2018 का पहला ग्रहण माघ शुक्ल पूर्णिमा पर खग्रास चन्द्रग्रहण होगा। सूतक सुबह 08 : 14 से शुरू होगा। क्योंकि चन्द्र ग्रहण का सूतक 12 घण्टे पूर्व लगता है यह ग्रहण पूरे भारतवर्ष में दिखाई देगा। चन्द्रग्रहण 31 जनवरी की शाम को 5 बचकर18 मिनट पर शुरू होगा और रात 8 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगा। यानि ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 24 मिनट होगी।
साल का लगने वाला यह पहला व पूर्ण चन्द्र ग्रहण होगा । ज्योतिषों और पंडितों ने चंद्रग्रहण को लेकर कुछ सलाह दी है। पंडितों और विद्वानों की मानें तो चंद्रग्रहण के दौरान कुछ काम नहीं करने चाहिए, नहीं तो बड़ी हानि हो सकती है।
क्या है चंद ग्रहण? : जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तब वह चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को रोकती है और उसमें अपनी छाया बनाती है। इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। वहीं, विज्ञान के अनुसार यह एक प्रकार की खगोलीय स्थिति है। जिनमें चंद्रमा, पृथ्वी और पृथ्वी तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं। इससे चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है, जिस वजह से उसकी रोशनी फीकी पड़ जाती है।
क्या है पौराणिक मान्यता: एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार समुद्र मंथन के दौरान असुरों और दानवों के बीच अमृत के लिए घमासान चल रहा था। इस मंथन में अमृत देवताओं को मिला लेकिन असुरों ने उसे छीन लिया। अमृत को वापस लाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और असुरों से अमृत ले लिया। जब वह उस अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर अमृत पिने के लिए बैठ गया। जैसे ही वो अमृत पीकर हटा, भगवान सूर्य और चंद्रमा को भनक हो गई कि वह असुर है। तुरंत उससे अमृत छीना गया और विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी।
क्योंकि वो अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं। उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम के ग्रह पर गिरकर स्थापित हो गए। ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है, इसी वजह से उनकी चमक कुछ देर के लिए चली जाती है। वहीं, इसके साथ यह भी माना जाता है कि जिन लोगों की राशि में सूर्य और चंद्रमा मौजूद होते हैं उनके लिए यह ग्रहण बुरा प्रभाव डालता है।
यह ग्रहण कर्क राशि वालो के लिए विशेष कष्टप्रद होगा क्योंकि कर्क राशि के चन्द्रमा पे ही यह ग्रहण है कर्क राशि के चन्द्र के ग्रहण का फल अन्य राशियों के लिए ,
मेष = कष्ट
वृष = धनलाभ
मिथुन =हानि
कर्क =घात
सिंह =हानि
कन्या =लाभ
तुला =सुख
वृश्चिक =अपमान
धनु = कष्ट
मकर = स्त्री / पति कष्ट
कुंभ =सुख
मीन = चिंता
यह ग्रहण माघ पूर्णिमा को घटित हो रहा है अतः गंगा , आदि पवित्र नदियों और अन्य तीर्थ स्थानों पर , स्नान , दान , मंत्रजप, का विशेष महत्व हो जाता है तो दान , होम , अनुष्ठान आदि का विशेष महत्व होगा , यह चन्द्र ग्रहण विकलांगो , आदिवासी और पंजाब के लिए कष्टप्रद है
1. ग्रहण के वक्त खुले आकाश में ना निकलें, खासकर प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग, रोगी और बच्चे।
2. ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं।
3. किसी भी तरह का शुभ कार्य ना करें और पूजा भी ना करें. इसी वजह से ग्रहण के दौरान मंदिर के द्वार भी बंद कर दिए जाते हैं।
क्या करें
1. दान करें. दान में आटा, चावल, चीनी, दाल आदि दें।
2. ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए दुर्गा चालीसा या श्रीमदभागवत गीता आदि का पाठ भी करें।
3. जो लोग साढ़े-साती से परेशान हो तो शनि मंत्र का जाप करें या फिर हनुमान चालीसा पढ़ें।