आकांक्षा मिश्रा-
उसने
कहा मेरे पास शब्द है
तुम्हें जानने के लिए
इतने शब्द
हालात सम्भालने के काम आ सके
क्या कहूँ ?
अभी-अभी
हृदय की पीड़ा बढ़ रही
तुम अभी मौन हो
ये मन का ग्राफ
नैसर्गिक सौंदर्य के बीच से
वापस आता हुआ
निकटता ला रहा हैं
चेतना से संचित शब्द
गहरे हो रहे
मैं खोज रहा हूँ
रूप देने के लिए
मौन शब्द
अभिधा में व्यंजना निरूपित
करती हुई
अनेक शब्द जीवन में
रंग भर रहे हैं
तुम्हारे हृदय में
ग्राफ की भांति कई रेखाएं
खींचती हुई
अनेक सुंदर रंग से डुबों रहे हैं
ये मौन शब्द से
सृजन की अभिव्यक्ति
आह्वान की गति से
पक्ष लेता हुआ
फिर तुम्हें पुकार रहा हैं ।