- लखनऊ-हरदोई राजमार्ग पर सड़क के किनारे एक हफ्ते से पड़े विक्षिप्त युवक का नहीं है कोई पुरसाहाल ।
कछौना (हरदोई): आधुनिकता की भागदौड़ में इंसानियत आधुनिक परिवेश में खो गई है। जिनके ऊपर मानव जीवन की उत्थान की जिम्मेदारी है, वह मूकदर्शक हैं।
सामाजिकता की पुरजोर वकालत करने वाली राजनीतिक पार्टियां, सामाजिक संगठन बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। परन्तु इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर लखनऊ-हरदोई राजमार्ग पर बी०एस०एन०एल० टावर के सामने एक विक्षिप्त युवक घायल अवस्था में सड़क के किनारे एक सप्ताह से पड़ा है। जो कड़कड़ाती धूप में बिना पानी, भोजन के पड़ा है। कुछ दयालु राहगीर बोतल में पानी व कुछ खाने को उपलब्ध करा देते हैं। यह हमारे देश का लोकतंत्र है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस प्रशासन गुजरते हैं। लेकिन किसी को वह विक्षिप्त युवक नहीं दिखाई पड़ता है। क्योंकि समाज में उसकी उपयोगिता नहीं रह गई है। इसलिए वह तड़प-तड़प कर मरने को विवश है।
समाज कल्याण की योजनाएं कागजों में चल रही हैं। आधुनिकता की अंधी दौड़ में सभी व्यस्त हैं। चंद दिनों बाद उसकी किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आने, कड़कड़ाती धूप व भूख-प्यास से मृत्यु हो जाएगी। वह विक्षिप्त युवक सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगा। एक दिन अखबार में उस विक्षिप्त की मृत्यु न्यूज़ प्रकाशित हो जाएगी। बस इसी प्रकार इसका अंत हो जायेगा।
रिपोर्ट- पी०डी० गुप्ता