लखनऊ में ‘आरोपित’ के नाम पर उत्तरप्रदेश-सरकार का घिनौना कृत्य!

पृथ्वीनाथ पाण्डेय-

लखनऊ (उत्तरप्रदेश) में सरकार की शह पर उन लोग के चित्र लगाये गये हैं, जो केवल आरोपित हैं, न कि अपराधी। क्या देश के क़ानून में ऐसा कोई नियम है?

निस्सन्देह, ऐसा करना क़ानूनी अपराध है। यदि वे आरोपित लोग न्यायालय पहुँच गये तो उत्तरप्रदेश-सरकार घुटनो के बल रेंगने लगेगी। सरकार को जो भी व्यक्ति अपराधी लग रहा हो, उसके विरुद्ध विधिक कार्यवाही करवाये; वह स्वयं मात्र ‘दोषारोपण’ के नाम पर किसी को भी सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं कर सकती। यह नया प्रयोग आरोपितों और उनके परिवार को अपमानित करने की सोची-समझी चाल है।

हाँ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, उत्तरप्रदेश ने स्वत: संज्ञान किया है और इस पर आपत्ति व्यक्त की है। इससे उत्तरप्रदेश-सरकार का निकम्मापन ज़ाहिर हो रहा है। दूसरे शब्दों में– उत्तरप्रदेश-सरकार ने देश के क़ानून को अपने हाथों में ले लिया है, जो कि घिनौना, लज्जास्पद तथा घोर आपत्तिजनक कृत्य है।

कल (९ मार्च) इलाहाबाद उच्च न्यायालय इस विषय पर सुनवायी करेगा और अपना निर्णय भी सुनायेगा, फिर उत्तरप्रदेश-सरकार अपनी अस्ली औक़ात पर आ जायेगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– पृथ्वीनाथ पाण्डेय; प्रयागराज; ८ मार्च, २०२० ईसवी)