कविता : राजेश पुरोहित विरचित दोहे

बहते आँसू आँख से, जाने न कोई पीर।
जाने वो समझे नहीं, समझे जो गम्भीर।।

आँसू टपके नैन से,बहने लगी है धार।
पिया मिलन की आस मे,चोट खाई हज़ार।।

देख आँसू माई के ,लखन हुए गम्भीर।
वन गमन की हो रही,तैयारी भरपूर।।

आँसू होते कीमती,इनकी कीमत जान।
बहते जिसके ये सदा,मन मे दुख तू जान।।

बेटी के आँसू दिखे,बाबुल समझ न पाय।
कैसी पीड़ा है उसे,मन से कहा न जाय।।

पहली बारिश आ गई,आई काली रात।
पिया गए परदेस में,हुई न कोई बात।।

डॉ. राजेश पुरोहित