समाज या राष्ट्र में धार्मिक सह-अस्तित्व उत्पन्न करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि धर्म तो केवल एक होता है

  • आज अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर आधारित विशेष आर्टिकल
  • “सत्यात्मक न्याय” ही मानवी समाज व मानवी राष्ट्र का एकमात्र धर्म है।

संसार मे कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है जो अपने लिए न्याय न चाहता हो। आवश्यकता है तो केवल एक ऐसी आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार जैसी व्यवस्था की जिसे आजकल Delhi Model के नाम से विश्वख्याति प्राप्त हो रही है, जो राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक के न्यायोचित जनहितों को प्रतिष्ठित कर रही है।

जिसमें प्रत्येक मनुष्य के जीवनोत्थान से जुड़ा पहला अनिवार्य जनाधिकार पूर्णशिक्षा-प्रशिक्षण (Complete Education) का जो निःशुल्क, अनिवार्य, अबाध्य रूप से प्रत्येक नागरिक को दिया जाना चाहिए। ताकि वो अपने आर्थिक, सांस्कृतिक, व्यवहारिक एवं आध्यात्मिक जीवन जीने के न्यायोचित मार्ग को जान व जी सकने में सक्षम बनें।

दूसरा अनिवार्य जनाधिकार प्रतिपरिवार पात्रतानुसार एक रोजगार/नौकरी का अवसर व संसाधन प्रत्येक नागरिक परिवार को दिया जाना चाहिए। ताकि वो अपना व अपने परिवार के आर्थिक हितों की पूर्ति समुचित रूप से कर सकने में सक्षम बने।

तीसरा अनिवार्य जनाधिकार प्रत्येक गाँव/मोहल्ले को समानुपातिक रूप से सड़क, औसत मध्यम स्तर तक मुफ्त पीने का साफ़ पानी, बिजली, संचार, इंटरनेट, परिवहन, बाज़ार, स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, व सभी सरकारी योजनाओं से जुड़े दस्तावेज़ बनवाने हेतु आसान प्रक्रिया इत्यादि। ताकि उनके सामाजिक जीवनचर्या को उन्नत बनाने में दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े सार्वजनिक उपक्रम उनके मददगार बन सके।

चौथा अनिवार्य जनाधिकार प्रत्येक समुदाय के मानवीय जीवन को सुरक्षित बनाने हेतु निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था, बीमा, बैंकिंग, सेल्टरिंग व वृद्धा पेंशन इत्यादि। ताकि वे सभी मनुष्य अपने जीवन के अतिमहत्वपूर्ण उद्देश्य को जनहित के लिए पूर्ण समर्पित कर सकने में सदैव सक्षम बने रहें।

सांस्कृतिक सम्प्रदाय/समुदाय अथवा कल्ट (Cult) अवश्य ही अनेक हो सकते। संस्कृति निजीआचरण का विषय है और निजी मामलों की स्वतंत्रता होनी ही चाहिए। अतः सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की भी आवश्यकता नहीं है।

अब समय आ चुका है कि भारत का प्रत्येक नागरिक अपने वास्तविक मानवाधिकारों को जाने समझे व उन्हें प्राप्त करने हेतु राष्ट्र की इकलौती राजनैतिक पार्टी आम आदमी पार्टी का हिस्सा बने व आदरणीय अरविंद केजरीवाल जी के सहयोग से अपने इन उपरोक्त चारों जनाधिकारों को प्राप्त कर वास्तविक मानवाधिकारों को जीने योग्य बने।

क्योंकि बिना चारों जनाधिकारों को प्राप्त किये कोई भी मनुष्य अपने वास्तविक मानवाधिकारों या विशेषाधिकारों को नही प्राप्त कर सकता और न ही उन्हें जी सकता।

✍ राम गुप्ता
(स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आमआदमीपार्टी, उत्तरप्रदेश