Reserve Bank of India जिसदिन रेपो रेट 0% कर देगी उसीदिन से महँगाई पूर्णतः कंट्रोल में आ जायेगी।
क्योंकि सारा खेल ही मुद्रा पर अधिभार लगाने से शुरू होता है।
चूँकि मुद्रा आम नागरिकों के परिश्रम से उपार्जित पारिश्रमिक के लेन-देन का एक स्वरूप होता है।
इसलिए यदि किसी नागरिक द्वारा किये गए पारिश्रमिक में से कुछ हिस्सा अधिभार अर्थात टैक्स, रेवेन्यू, ब्याज उससे रेपोरेट के रूप में RBI/सरकार वसूली करती है तो सीधे-सीधे नागरिकों के परिश्रम (व्यापार-व्यवसाय-उद्यम-श्रम-पूँजी-सुविधा) पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।
इससे वह नागरिक (व्यापारी-व्यवसायी-उद्यमी-श्रमिक-पूँजीपति-सुविधा प्रदान करने वाली संस्था) उस अतिरिक्त अधिभार को आम नागरिकों से अपने परिश्रम रूपी वस्तु को महंगा करके अपना पारिश्रमिक वसूलता है।
इसीकारण वस्तुओं के दाम महँगे हो जाते हैं।
सरकारें व RBI यदि सचमुच देश के नागरिकों के लिए फिक्रमंद है तो तत्काल प्रभाव से मुद्रा पर से सभी प्रकार के अधिभार, टैक्स, रेवेन्यू, रेपोरेट इत्यादि हटाये।
महँगाई स्वतः कंट्रोल में आना शुरू हो जाएगी।
रेपोरेट 0 होते ही देश की मुद्रा की जमाखोरी पर पूर्णतः विराम लगेगा।
क्योंकि मुद्रा पर ब्याज का लेन-देन भी तब स्वतः बन्द हो जाएगा।
बैंकों द्वारा जारी यह आधिकारिक लूट का खेल उसीदिन समाप्त हो जाएगा।
जिसदिन RBI ने रेपोरेट 0 किया उसीदिन से करेंसी छपना बन्द हो जाएगी क्योंकि RBI जो मुद्रा पर अधिभार (रेपोरेट) लगाकर वसूली करती है वह करेंसी को छापने व उसके मेंटीनेंस के बदले ही रेपोरेट के रूप में लेती है, सोंचिये जब मुद्रा छपेगी ही नही तो मुद्रा का कोई स्वरूप ही अस्तित्व में नही होगा, और अस्तित्वहीन वस्तु पर कोई अधिभार देना ही नही पड़ेगा।
रेपोरेट समाप्त होते पर करेंसी छपना बन्द और करेंसी का प्रचालन भी बंद हो जाएगा।
करेंसी का प्रचालन बन्द होते ही सभी प्रकार के मौद्रिक भ्रष्टाचार स्वतः बन्द हो जाएंगे क्योंकि तब मुद्रा का एक ही स्वरूप प्रचलन में होगा जिसे अंकमुद्रा अर्थात डिजिटल करेंसी सिस्टम के रूप में जाना जाता है।
इतना ही नही जब करेंसी छपना बन्द तो नकली करेंसी का प्रचालन भी पूर्णतः समाप्त हो जाएगा।
क्योंकि तब अंकमुद्रा का कोई स्वरूप नही होगा।
करेंसी छपना बन्द होते ही कालेधन (अनरेकॉर्डेड धन-संपत्ति) का संचय करना हमेशा हमेशा के लिए स्वतः बन्द हो जाएगा।
करेंसी छपना बन्द होते ही सरकारी टैक्स चोरी भी स्वतः समाप्त हो जाएगी क्योंकि तब बिना रिकॉर्ड के कोई भी मौद्रिक लेन-देन करना सम्भव नही होगा।
और आपकी सालाना आय पर निर्धारित टैक्स को एक साथ लेने के बजाय .5% या 1% टीडीबी (टैक्स डिडक्टेड at बैंक) आपके प्रति ट्रांजेक्शन आपके खाते पर से ले लिया जाएगा इससे आपको पता भी नही चलेगा और आपका टैक्स भी सरकार के पास नियमित पहुँचेगा।
करेंसी छपना बन्द होते ही सभी प्रकार के मौद्रिक अपराध जैसे आतंकवाद, हवाला, घोटाला, धन देकर/लेकर किये जाने वाले सभी प्रकार के अपराध पूर्णतः समाप्त हो जाएंगे।
अब विचार स्वयं कीजिये कि यदि RBI आज अभी इसीवक़्त रेपोरेट 0 करने की घोषणा करता है तो इस देश से महँगाई ही नही बल्कि गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कालाधन, नकली नोट, टैक्स चोरी व आतंकवाद, घोटाला, हवाला व राजनैतिक धूर्तता पूर्णतः समाप्त हो जाएगा।
क्योंकि सारा खेल ही मुद्रा पर अधिभार से शुरू किया गया था।
ऐसा भी नही है कि RBI नही कर सकती क्योंकि वह एक स्वायत्त सरकारी संस्थान है जिसे देशहित में यह कदम उठाना ही चाहिए।
बशर्ते नियत में ईमानदारी हो!
सोचिये!
प्रतिक्रिया अवश्य दीजिये, यदि सचमुच आप देश के नागरिकों की 75 वर्षीय दुर्दशा पर चिंतित हैं तो ..!
बिना यह सोचे की आप बड़े धुरंधर बुद्धिजीवी हैं और प्रतिक्रिया देने पर मुझ जैसे अति सूक्ष्म मनुष्य के सामने आप छोटे बन जायेंगे।
।।शुभकामना।।
✍ राम गुप्ता (स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आमआदमीपार्टी, उत्तरप्रदेश