मेरे नयनो की प्रत्याशा मत लिख!

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

मेरी निगाहों की भाषा मत लिख!
मेरी नज़रों की आशा मत लिख!
देख! मंज़र जवाँ हो रहा हौले-हौले,
मेरे नेत्रों की अभिलाषा मत लिख!
तुझे बूझते-बूझते बुझता जा रहा,
मेरी आँखों की परिभाषा मत लिख!
ज़माना बीत गया ज़ेह्न मे बसाये तुझे,
मेरे नयनो की प्रत्याशा मत लिख!
साध डेहरी पर ही कुँभलाती रही,
मेरे लोचन की अभिलाषा मत लिख!

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३ अक्तूबर, २०२२ ईसवी।)