हम भारतीय कल ग़ुलाम थे तो आज क्या हैँ?
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन-दिनांक (१० मई) की पूर्व-संध्या मे आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन-दिनांक (१० मई) की पूर्व-संध्या मे आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन
‘उत्तरप्रदेश अधीनस्थ चयन आयोग की प्रारम्भिक पात्रता-परीक्षा’ मे पचास से अधिक अशुद्ध शब्दप्रयोग और अन्य व्याकरणात्मक दोष दिखने का दावा•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्रश्नपत्र तैयार करनेवाले को ‘भेड़िया’, ‘बन्दरिया’, ‘नवसिखिए’ और ‘महत्त्व’ लिखने भी नहीँ आता!..?अभी हाल मे […]
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••मेरे लिए अतिशय गर्व और गौरव का विषय है कि जिस शिक्षण-संस्थान से मैने स्नातक की उपाधि अर्जित की थी; जहाँकी समस्त साहित्यिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियोँ का संचालन करता था तथा जहाँ छात्र-सम्पादक […]
एक अन्तरंग संस्मरण आज (२७ जुलाई) भ्राताश्री, पूर्व-राष्ट्रपति अबुल कलाम जी की निधनतिथि/का निधनदिनांक (‘दिनाँक’ अशुद्ध है।) है। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय डॉ० अब्दुल कलाम प्रेय थे तो श्रेय भी। उन्होंने जब राष्ट्रपति-पद की […]
प्रश्न एक– ‘प्राकृत पैंगलम्’ है :–१– एक ग्रन्थ है।२– एक प्रकार की लिपि३– चीन की एक ऐतिहासिक मीनार४– प्राकृतिक भाषा के प्रवर्तन करनेवाले ऋषि का नामप्रश्न दो– निम्नांकित बोलियोँ मे से कौन-सी बोली पश्चिमी हिन्दी […]
उपर्युक्त (‘उपरोक्त’ अशुद्ध है।) शीर्षक पढ़कर आप सबको आश्चर्य होता होगा; परन्तु सत्य वही है, जिसे आपने पढ़ा है। देश-देशान्तर मे हमारी कर्मशाला इतिहास और कीर्त्तिमान के पृष्ठोँ पर रेखांकित होती आ रही है; परन्तु […]
चिर-प्रतीक्षित कृति का यह ‘दूसरा प्रूफ़’ है। हम अतिशीघ्र उपर्युक्त कृति को सार्वजनिक करेँगे। इसप्रकार की कोई कृति अभी तक उपलब्ध नहीँ है। हमने अपनी इस कृति का प्रणयन करते समय पूर्ण मनोयोग से ‘शब्ददर्शन’ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल चन्दा, दिखता धन्धा;भक्ति-भाव है, मन्दा-मन्दा।भक्त और भगवान् का नाता;खेल खेलते गन्दा-गन्दा।अन्धभक्ति का खेल निराला;गले पड़ा ज्यों निर्मम फन्दा।पकड़ गिराओ बहुरुपियों को;रगड़ो जैसे रगड़े रन्दा।क्रान्ति-पलीता आग छुआ दे;लाओ कहीं से […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• क़र्ज़ तब लिया जाता है जब मन और हृदय मे उसे चुकाने की मंशा भी हो। यही कारण है कि उस क़र्ज़ को लेकर ‘अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष’ (आइ० एम० एफ०) […]
(एक)जंगल का क़ानून•••••••••••••••••••••••••••••••• जंगल का मिजाज़,बेख़ौफ़, आवारा-सी दिखती हवा के इर्द-गिर्दसिमटकर रह गया है।कल तक जो जंगली पेड़ों के पत्ते हिलते थे; सरसराते थे,अब चुप, मौन, डरे-डरे, सहमे दिख रहे हैं।ख़ून खौलाता दहाड़ सुनो!उस मक्कार-शातिर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुट्ठी तान लो!मरी हुईं अँगुलियों के इर्द-गिर्दमक्खियाँ भिनभिनाती हैं।पुरुषार्थ के अंगारे को चूम लो!राख मे दबी हुई चिनगारी कोअलसाने मत दो।हर खेत मे,चिनगारी की सुगबुगाहट बो दो।हवा अपना रास्ताख़ुद-ब-ख़ुद तलाश […]
जब मै इस आततायी सरकार की देश और राष्ट्रविरोधी नीतियों पर प्रहार करता हूँ और उसके नंगे चरित्र को सामने लाता हूँ तब इस ‘फ़ेसबुक’ मे जितने भी चेहरे भरे हुए हैं, उनमे से बहुसंख्यकजन […]
आज (११ सितम्बर) कनिष्ठ पुत्री ‘कर्णिका’ का देश के शीर्षस्थ रेडियो चैनल ‘रेडियो मिर्ची’ मे ‘रेडियो जॉकी’ के रूप मे चार वर्ष पूर्ण हुए हैं। सुपुत्री कर्णिका! जीवन्तता के साथ कर्त्तव्यपरायणता का परिचय प्रस्तुत करती […]
● महीयसी महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि (११ सितम्बर) पर विशेष ■”आज का आलोचक ‘निन्दा’ के लिए लिखता है”– महादेवी वर्मा (महादेवी जी के साथ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-द्वारा की गयी एक भेंटवार्त्ता) मैने महादेवी जी के […]
आकाशवाणी, प्रयागराजसुनिए, शनिवार; १२ अगस्त, २०२३ ई० को :―सायं ७:३० बजे‘हिन्दीभाषा और उसका मानकीकरण’वार्त्ताकार :―आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेयप्रस्तुति :― आकाशवाणी आकाशवाणी, प्रयागराज की ओर से भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय १२ अगस्त को ‘हिन्दीभाषा और […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पुरी की इस वार्षिक रथयात्रा मे भगदड़ मचने से कम-से-कम १० लोग की मृत्यु हो चुकी है और लगभग ५० लोग घायल हो चुके हैं। इतना ही नहीं, अन्य राज्यों […]
एक यात्रा-संस्मरण ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जनाब! लखनऊ भी एक शहर है, जो दिल्ली की तरह आलम (सबसे अधिक जाननेवाला) मे इन्तिख़ाब (बहुतों मे से कुछ को छाँट लेना) तो नहीं; लेकिन अपनी तहज़ीबी […]
सहज और सरस आचरणसहित मनुष्य मे ही स्वभावत: ‘विनयशीलता’ रहती है। उसकी वही नमनशीलता कर्कश चरित्र को भी शीतल कर देती है। ऐसे ही लोग वस्तुत: ‘साधु’, ‘संत’, ‘महात्मा’, ‘पीर-फ़क़ीर’ इत्यादिक हैं; उनसे इतर साधु, […]
देश के शासनसंचालकवृन्द!जय भारत।मैने देशवासियों की मानसिक स्थिति और उसकी आह-संवेदना का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह पत्र आप सभी के नाम समवेत रूप मे निर्भीकतापूर्वक प्रेषित किया है। आप लोग समस्त शासन-संचालकों को देश के […]
भाषाविज्ञानी एवं समीक्षक प्रयागराज के आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की ओर से आयोजित वर्धा (महाराष्ट्र) के द्विदिवसीय (२५-२६ फ़रवरी) ७४वें राष्ट्रीय अधिवेशन मे विशिष्ट वक्ता के रूप मे आमन्त्रित किया […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस जगत् मे ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जो आप कुछ सोचें और वह उस सोच को, आपसे बिना कोई प्रश्न किये, सीधे बता सके। आप जब कुछ सोचते हैं […]
■ यदि आपको इसमे से किसी भी प्रकार की अशुद्धि दिखे तो हमारा समुचित मार्गदर्शन करें, स्वागत है।◆ यहाँ वे शब्द हैं, जिनका विश्व-समाज जाने-अनजाने (‘अंजाने’ और ‘अन्जाने’ अशुद्ध हैं।) अशुद्ध और अनुपयुक्त व्यवहार करता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शरीर मुझसे दूर जा रहा है,वा शरीर से दूर जा रहा हूँ।अशरीरी रहकर जीवन की कल्पनासमृद्धि के अन्तिम छोर पर अडिग खड़ी है।चर्मचक्षु से परे अपरा-पराविद्याका स्मृति-वातायनमन-गाम्भीर्य का दोहन नहीं […]
◆ साग्रह अनुरोध–आप सभी इस टिप्पणी मे से किसी भी प्रकार की सकारण अशुद्धि/अशुद्धियाँ निकालें और मेरा मार्गदर्शन करें।••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••आत्मीय विद्यार्थिवृन्द!किसी भी स्तर की परीक्षा के हिन्दीभाषा/हिन्दी-भाषा (‘हिन्दी भाषा’ अशुद्ध है।) /सामान्य हिन्दी और हिन्दीसाहित्य/ हिन्दी-साहित्य […]
शुद्ध और उपयुक्त शब्द :– परिक्षा और परीक्षा। ★ परिक्षा– इस ‘परिक्षा’ शब्द की वर्तनी (अक्षरी) देखते ही कोई भी सुस्पष्ट शब्दों मे कह देगा– यह जो ‘परिक्षा’ शब्द दिख रहा है, पूरी तरह से […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–इधर लाश-अम्बार है, उधर चुनावी बोल।लज्जा हँस-हँस घूमकर, पीट रही है ढोल।।दो–लोग बने लतख़ोर हैं, आँख हुई हैं बन्द।नेता हैं सब जानते, रचते तब फरफन्द।।तीन–अन्धेरा भीतर भरा, बाहर दीप-प्रकाश।भूख देह […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तुमने राम, कृष्ण, लक्ष्मण, हनुमान आदिक को देखा है? देखा था? तुम्हें अब तक इनसे क्या मिला है? इसके बाद भी तुम इन सभी के अन्धभक्त बने हुए हो और […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हास कोइतिहास मत बनने दो;उपहास को,परिहास मत बनने दो।आगत-अनागतथाली मे तेल-बाती लिये,प्रतीक्षा सह रहे हैं;बाट जोह रहे हैं; उस पल का,जब तुम अपने होनेअथवा न होने की प्रतीति का,अनुभव कराओगे।मेरे […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ग़म-ख़ुशी का फ़र्क़, महसूस होता है;यहाँ न कोई अपना, महसूस होता है।सौग़ात में मिलता रहा, दर्द का पिटारा;रिश्तों में दरार, अब महसूस होता है।जवानी ने भी छीन लीं, किलकारियाँ;बचपन बुढ़ापे-सा, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शिक्षिका मनोरमा जी!आपने यह वीडियो प्रस्तुत करके अपने खोखले ‘संस्कृत-ज्ञान’ का बहुविध परिचय प्रस्तुत कर दिया है। शुद्ध शब्द ‘संस्कृत’ है; उच्चारण ‘सम्सकृत’ है, न कि ‘सन्स्कृत’। आप सभी का […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पत्नी उवाच :–सम्बल अपनी बाँह का, कभी न देना छोड़।कितना भी संकट रहे, दु:ख से करना होड़।।हर जन्म हम संग चलें, ऐसी अपनी चाह।खटपट भी होता रहे, अलग न होगी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चिन्दी-चिन्दी रातें पायीं,फाँकों में मुलाक़ात रही।मुरझायीं पंखुरियाँ देखीं,सहमी-सकुची बात रही।बेमुराद आँसू हैं छलके,याद पुरानी घात रही।दुलराते बूढ़े ज़ख़्मों को,बची-खुची बस रात रही।दौड़ा-धूपा हाथ न आया,परवशता की लात रही।भूखा पेट मौन […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरी निगाहों की भाषा मत लिख!मेरी नज़रों की आशा मत लिख!देख! मंज़र जवाँ हो रहा हौले-हौले,मेरे नेत्रों की अभिलाषा मत लिख!तुझे बूझते-बूझते बुझता जा रहा,मेरी आँखों की परिभाषा मत लिख!ज़माना […]
——०एक अभिव्यक्ति०—— ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कोई कट गया उनकी नज़रों से,पर्द: हट गया उनकी नज़रों से।झुकीं निगाहें क़ह्र बरपाती रहीं,मन फट गया उनकी नज़रों से।ग़ैरों मे शामिल थे और अपनो मे,अपना बँट गया […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केने से तू अइलू,केने से तू गइलू।अदतिया न छूटलि,घींच-घाँच के खइलू।सोगहग भा खाँड़ी-चुकी,मिलल जौन पइलू।नीमन भा बाउर,अपना मन के कइलू।पहले रहलू करियठ,चीकन अब कहइलू।तुहूँ ए लोकवा में,अपना लेखा भइलू। (सर्वाधिकार सुरक्षित– […]
●आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति।मन्दिर मे मूरत दिखे, उड़न-छू हुई शक्ति।।दो–पट्टी बाँधे आँख मे, देश जगाता चोर।भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब शोर।।तीन–अजब-ग़ज़ब के लोग हैं, शर्म-हया से […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कैसी विडम्बना है कि पहली ओर, हमारे धर्माचार्य अपने वचनामृत के अन्तर्गत ‘धर्म’ की परिभाषा करते हैं, “धारयते इति धर्म:।” अर्थात् जो धारण किया जाता है, वह ‘धर्म’ है। मनुष्य […]
मेरे हृदयप्रान्त की सम्राज्ञी कामिनी कविते! तुम्हारे सर्वांग पर जब मैने पहली बार दृष्टि-अनुलेपन किया था तब मुझे ऐसा प्रतीत हुआ था, मानो प्रकृति-सुरभि तुम्हारे अंग-प्रत्यंग और स्निग्ध प्राणों पर ओस भीगे हुए पुष्प की […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आँखों-ही-आँखों में, बात हो जाने दो, बातों-ही-बातों में, अब रात हो जाने दो। बनने-सँवरने लग गये, ख़यालात पुराने, रातों-ही-रातों में, मुलाक़ात हो जाने दो। ज़मानाए दराज़१ जुस्तजू, परायी ही रही, […]
एक– चालीसा नेता लिखैं, ‘पण्डित पृथ्वीनाथ’। झोरि-झोरि नेता कहैं, भूलै लियो न साथ।। दो– नेता जीव अजीब बा, दूहैं जनता रोज। दुइ डेग जनतौ बढ़ैन, करै वैसहीं खोज।। तीन– फँसा राम दुइ फाँक मा, अस […]
मन की मरती छाँव है, तन घायल हर रोज़।व्यथा-कथा भी मौन है, कोई ख़बर, न खोज।। (१) अन्धे के दरबार में, चीरहरण का खेल।गूँगे-बहरे हैं जुटे, लँगड़ों का भी मेल।। (२) ‘सधवा’ महँगाई दिखे, ‘विधवा’ […]
आत्मीय मित्रमण्डल!समय का समादर करना सीखें। समय सभी को समान रूप से देखता आया है। वह प्रत्येक मनुष्य का मूल्यांकन उसके कर्मों के आधार पर करता आया है। समय कभी निष्ठुर नहीं होता; प्रत्युत मनुष्य […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे समीप कुछ लोग बैठे हुए थे, तभी एक विचार कौंधा (मस्तिष्क/दिमाग़ मे कौंधा, अशुद्ध और अनुपयुक्त प्रयोग है; क्योंकि विचार ‘मस्तिष्क’/’दिमाग़’ मे ही कौंधता है।)। मेरे सामने दो गिलास […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ “हिन्दी हमारी मातृभाषा है, इसलिए हमारा अपनी भाषा के प्रति उत्कट अनुराग होना चाहिए। हमे अपनी माँ के प्रति जितनी श्रद्धा होती है उतनी ही अपनी भाषा के प्रति भी होनी […]
Raghavendra Kr. Tripathi ‘Raghav’ : Recently we had drawn the attention of the Commission to the serious inaccuracies made in the Hindi-subject papers of the PGT examination related to ‘Series A’. The Commission has recently […]