केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति की क्षमता, शक्ति और प्रभाव के बारे में लोगों में जागरूकता को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है। नई दिल्ली में आज सातवें आयुर्वेद दिवस समारोह में श्री सोनोवाल ने कहा कि यह परंपरागत प्रणाली न केवल बीमारियों की रोकथाम करती है बल्कि यह लोगों को स्वस्थ बनाये रखती है।
श्री सोनोवाल ने कहा कि देशवासियों को हजारों वर्षों से उपयोग में लाई जा रही भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे देश को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी। श्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन से आयुष क्षेत्र ने पूरे विश्व में अपनी अनूठी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि आयुष और जनजातीय कार्य मंत्रालयों ने देश के 10 करोड़ जनजातीय लोगों के लाभ के लिए काम करने के वास्ते एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
आयुष राज्य मंत्री डॉ. मुंजपरा महेन्द्रभाई कालूभाई ने कहा कि सरकार ने देश में आयुष प्रणाली को विकसित करने और इसे बढ़ावा देने तथा इसमें तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गुजरात के जामनगर में स्थापित किए जा रहे वैश्विक परंपरागत चिकित्सा केंद्र को मान्यता दे दी है। श्री मुंजपरा ने बताया कि वर्तमान में 30 से अधिक देशों में आयुर्वेद, परंपरागत चिकित्सा की मान्यता प्राप्त प्रणाली है और इसकी स्वीकार्यता में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि आयुष और हर्बल तथा दवाओं को एक सौ से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है। डॉ. मुंजपरा ने बताया कि आयुष उत्पादों के निर्यात और विश्वभर में इनकी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए आयुष निर्यात संवर्धन परिषद का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय आयुष उद्योग का वर्तमान कारोबार 18 अरब अमरीकी डॉलर से अधिक है और वर्ष 2014 से 2020 के दौरान इसके बाजार में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री, अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में आयुष प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान और विकास कार्य किए जा रहे हैं।