● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
कानपुर के ‘करौली बाबा’ उर्फ़ संतोष सिंह भदौरिया के गुण्डों-द्वारा एक चिकित्सक और उसके पिता के साथ गम्भीरतापूर्वक मारपीट किये जाने का जो वीडियो सार्वजनिक किया जा रहा है, उससे सुस्पष्ट हो गया है कि ‘सनातन धर्म’ के नाम पर चमत्कार करने का धन्धा गुण्डई के बल पर फूल-फल रहा है। उस कथित बाबा के विरुद्ध पीड़ित चिकित्सक सिद्धार्थ कानपुर-पुलिस-आयुक्त से मिलकर एफ० आइ० आर० दर्ज़ करायी है; परन्तु अभी तक उसकी और उसके गुण्डों की गिरिफ़्तारी नहीं की गयी है।

उक्त बाबा के गुण्डों ने नोएडा के चिकित्सक सिद्धार्थ चौधरी के सिर फोड़ दिये गये थे और उसकी नाक तोड़ दी थी। अभी किसी विपक्षी दल के नेता ने वैसा किया होता तो उसकी तत्काल गिरिफ़्तारी करा ली गयी रहती। जब कथित ढोंगी बाबा से घटना के विषय मे पत्रकारों ने पूछताछ की थी तब उसने उत्तर दिया था, “वह हमसे मिला ही नहीं। वह मुझे छू भी नहीं सकता।”
कानपुर के बिधनू मे १४ एकड़ मे फैला आश्रम है। अब प्रश्न है, उस विवादास्पद बाबा ने उतनी अधिक ज़मीन कैसे ख़रीद ली थी?
उल्लेखनीय है कि कथित बाबा पर ‘गुण्डा एक्ट’ और ‘गैंगेस्टर एक्ट’ भी लगाये जा चुके हैं। बैंक फ़र्ज़ीवाड़े का भी उसे दोषी पाया जा चुका है। उस पर हत्या करने और हत्या करने के प्रयास से सम्बन्धित कई मुक़द्दमे चल रहे थे। उसे जेल भी भेजा गया था। जेल से छूटने के बाद उसने ‘बाबा’ का रूप धारण कर लिया था। उस तथाकथित बाबा को यू० पी० ए० के शासन मे कोयला निगम के चेअरमैन-पद पर बैठा दिया गया था; परन्तु तत्कालीन विपक्षी नेताओं के विरोध के चलते, उसे हटाना पड़ा था। महेन्द्र सिंह टिकैत ने अपने समय मे उसे किसानो का नेता बनाया था।
उस पर एक अधिवक्ता ने भी दोषारोपण किया है। पीड़ित चिकित्सक की शिकायत पर उस धन्धेबाज़ बाबा पर कानपुर की पुलिस ने ‘भारतीय दण्ड संहिता’ के अन्तर्गत धाराएँ :― ३२३, ५०४ तथा ३२५ लागू की हैं। अब देखना है, उस निर्मम बाबा और उसके दुर्दान्त गुण्डों की गिरिफ़्तारी कब तक की जाती है?
(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ मार्च, २०२३ ईसवी।)