ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग

हरदोई। तहसील संडीला क्षेत्र के ग्राम सरसंड, पोस्ट सुभान खेड़ा के ग्रामीणों ने ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र लोगों के लिए आरक्षित भूमि पर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने जबरन कब्जा कर रखा है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सरसंड में मुख्य मार्ग से लेकर मिश्रीलाल पुत्र रामचरन के घर तक स्थित गाटा संख्या 92, 96 एवं 110 की परती/ग्राम समाज की भूमि का वर्ष 2010 में तत्कालीन ग्राम प्रधान रामदुलारी के कार्यकाल में आवंटन प्रस्तावित किया गया था। यह भूमि अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र लाभार्थियों को आवास एवं जीवनयापन हेतु दिए जाने के उद्देश्य से चिन्हित की गई थी। प्रस्तावित सूची में कुल 31 लोगों के नाम शामिल थे।

बताया गया कि आवंटन से पूर्व राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई जांच में 9 व्यक्तियों को अपात्र पाए जाने पर उनके पट्टे निरस्त कर दिए गए थे। इस संबंध में दैनिक जागरण और अमर उजाला में भी समाचार प्रकाशित हुआ था। संबंधित अभिलेख तहसील संडीला की पत्रावली संख्या-695 में सुरक्षित बताए गए हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में उक्त भूमि पर सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के कुछ लोगों द्वारा बिना किसी वैध अधिकार के अवैध कब्जा कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त गाटा संख्या-97, जो राजस्व अभिलेखों में ग्राम समाज की भूमि दर्ज है और जिसका आज तक किसी के नाम आवंटन नहीं हुआ, उस पर भी कथित रूप से दबंग व्यक्तियों ने जबरन कब्जा कर रखा है।

प्रार्थना पत्र में जिन लोगों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया है, उनमें घुरई पुत्र मंसुख, नन्दलाल पुत्र मंगू, बलराम पुत्र नन्हू, खिलाड़ीलाल पुत्र नरपति, कमर अली के परिजन, मो. इनाम, जियाउर रहमान तथा मो. वसीम के परिजनों के नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने कब्जाई गई भूमि को अन्य व्यक्तियों को बेच भी दिया है, जो राजस्व नियमों के विपरीत है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम समाज की भूमि से अवैध कब्जे हटवाकर दोषियों के विरुद्ध उ.प्र. राजस्व संहिता के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाए तथा भूमि को पुनः पात्र लाभार्थियों एवं ग्राम समाज के हित में सुरक्षित कराया जाए।