डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव–
हे त्रिभुवनपति! हे विश्वनाथ!
हे विश्वेश्वर! हे जगन्नाथ!
करुणा कर दो शम्भो मुझ पर,
हो शिवचरणो मे मेरा निवास।
शिव-शिव जपते बीते जीवन,
शिवमय हो मेरी प्रत्येक श्वास।।
हे डमरूधर! हे नंदीनाथ।
हे त्रिभुवनपति! हे विश्वनाथ!
हे विश्वेश्वर! हे जगन्नाथ!
हे परमेश्वर! हे देवनिरञ्जन!
हे मृत्युञ्जय! हे महाकाल!
दीन, अनाथ, अशक्तजनो के,
तुम ही प्रभु एक सहारे हो।
जग का विष पी लेने वाले,
तुम मानवता के उजियारे हो।
हे जयदेवेश्वर! हे वैद्यनाथ!
हे आत्मरूप! हे प्राणेश्वर!
हे रामेश्वर! हे उमानाथ!
हे त्रिभुवनपति! हे विश्वनाथ!
हे विश्वेश्वर! हे जगन्नाथ!