डॉ० ‘निश्शंक’ की मान्यता राजनेता से बढ़कर एक कुशल साहित्यकार की रही है– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


प्रतिष्ठित साहित्यकार, राजनेता एवं पत्रकार रमेशचन्द्र पोखरियाल ‘निश्शंक’ के जन्मदिनांक (१५ जुलाई) के अवसर पर ‘रमेशचन्द्र पोखरियाल की दृष्टि और सृष्टि’ विषय पर सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका (झारखण्ड) मे एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रयागराज से प्रख्यात व्याकरणाचार्य और भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय थे।


इस अवसर पर उद्घाटन-उद्गार व्यक्त करते हुए, आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया कि डॉ० रमेशचन्द्र पोखरियाल ‘निश्शंक’ जी की मान्यता राजनेता से बढ़कर ‘एक कुशल साहित्यकार’ की रही है। उन्होँने अत्यल्प समय मे साहित्य के क्षेत्र मे एक महती उपलब्धि अर्जित कर ली है, जो उनकी साहित्यप्रियता को बहुविध रेखांकित करती आ रही है। सामाजिक संवेदना के धनी निश्शंक जी ने काव्य के क्षेत्र मे अपनी जिस प्रातिभसामर्थ्य का सुपरिचय दिया है, उससे उनकी शब्दशक्ति मे मारक प्रवृत्ति लक्षित होती है। उनकी रचनाओँ मे जन-जन की आह और संवेदना का रस प्रवाहित होता संलक्षित होता है। डॉ० निश्शंक जी दीर्घजीवी होँ और अपनी साहित्यसेवा से समाज का मार्गदर्शन करते रहेँ, कामना है।


समारोह-संयोजक डॉ० अजय शुक्ल ने कहा कि डॉ० निश्शंक जी का एक राजनेता के रूप मे विशेष अवदान रहा है। उन्होँने अपनी साहित्यसेवा से हर वर्ग का ध्यान अपनी ओर खीँचा है। उनकी कृतियाँ बड़ी संख्या मे हैँ; अनेक विश्वविद्यालयोँ की ओर से उनपर शोधकार्य किये जा चुके हैँ और किये जा रहे हैँ।


डॉ० अमीर हसन ने कहा कि डॉ० निश्शंक जी ने उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री के रूप मे जो लोककल्याणकारी कार्य किये हैँ, वे प्रशंसनीय हैँ। उन्होँने “साहित्य समाज का दर्पण है”, इसको अपने साहित्य-रचना से सार्थक सिद्ध कर दिखाया है।


डॉ० राजेश प्रसाद ने कहा कि डॉ० निश्शंक का व्यक्तित्व अत्यन्त मिलनसार है। वे उत्तम कोटि के साहित्यकार भी हैँ। उनका साहित्य का अत्यन्त विस्तार दिखता है।


समारोह का संयोजन और संचालन विश्वविद्यालय मे हिन्दी-विभाग के डॉ० अजय शुक्ल ने किया था।