प्रतिष्ठित साहित्यकार सुधीर अग्निहोत्री का आज (१ दिसम्बर) रसूलाबाद, प्रयागराज के श्मशानघाट पर साहित्यकारों-पत्रकारों तथा अन्य गण्यमान्यजन के बीच अन्तिम संस्कार कर दिया गया। स्मृति-शेष सुधीर अग्निहोत्री की धू-धू कर जलती चिता के मध्य ‘सर्जनपीठ’ और ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ के संयुक्त तत्त्वावधान में एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित जन ने उनके कार्यों पर बहुविध प्रकाश डाला।

शोकसभा के आयोजक भाषाविद् आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा, “सुधीर जी हमारी भाषिक पाठशाला की ओर से आरम्भ किये गये अभियान ‘अपनी भाषा सुधारिए’ के प्रमुख स्तम्भ थे। वे सर्वहारा-वर्ग के प्रतिनिधि साहित्यकार थे।” वरिष्ठ पत्रकार आनन्द सागर ओझा ने कहा, “सुधीर जी एक बहुत अच्छे इंसान थे।” साहित्यकार डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने कहा, “सुधीर जी एक कुशल संयोजक और प्रस्तोता थे।” वरिष्ठ पत्रकार तौक़ीर ख़ान ने कहा, “सुधीर जी एक निर्भीक पत्रकार थे।” सुधीर अग्निहोत्री के नये उपक्रम ‘निष्पक्ष संवाद’ के छायाकार अभिनय सेठ ने कहा, “सुधीर जी एक स्वाभिमानी व्यक्ति थे।” वरिष्ठ पत्रकार सन्दीप वालिया ने कहा, “सुधीर जी प्रतिबध्द और जीवनमूल्यों को जीनेवाले साहित्यकार थे।”
इस अवसर पर केशवचन्द्र वर्मा, संजीव सरस, डॉ० ओमप्रकाश सेठ, दिनेशचन्द्र त्रिपाठी, रत्नेश द्विवेदी, विमल मेहरोत्रा, मनीषदेव शर्मा, स्वर्ण सिंह जग्गी, पप्पन जी टण्डन, कुँवर जी टण्डन आदि सम्मानितजन उपस्थित थे।