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रास्ते नहीं, ‘मंज़िल’ तय करें

आत्मपरीक्षण कर ‘सीख’ ग्रहण करें

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

वर्ष २०२० में आपसे कहाँ-कहाँ किस-किस तरह की क्यों और कैसे भूल हुई थी? किस-किस व्यक्ति ने आपके साथ किस-किस प्रकार का विश्वासघात किया था और क्यों? आपने किस-किस के भरोसे को चोट पहुँचायी थी? आपका उन्माद और प्रमाद कहाँ-कहाँ झलक रहा था? आप कब और क्यों अतिरिक्त ‘आत्मविश्वासी’ बनते रहे, जिसका भान आपको नहीं था? आपने किस-किसके साथ छलावा किया था? जो निष्पाप और निर्दोष था, उसका मन आपने क्यों आहत किया था और तब आपको ग्लानि हुई थी? अपराधबोध हुआ था? आप पश्चात्ताप और प्रायश्चित की प्रक्रियाओं से जुड़ना चाहे थे? इन सभी प्रश्नों के आलोक में आपको ‘स्वयं से तटस्थ उत्तर पाने होंगे।

दूसरी ओर, आपके अध्यवसाय में क्या और कौन-सी कमी रह गयी थी, जिसके कारण आप गन्तव्य तक पहुँचने में समर्थ नहीं बन सके थे? आप ऐसी किस घटना के साक्षी बने थे, जिसका चिन्तन-अनुचिन्तन आपको वस्तुत: ‘मानव’ की श्रेणी में ला खड़ा करता है? ऐसा कौन-सा लक्ष्य है, जिसका संधान करते समय आपके पाँव ठिठक जाते हैं?— इन सभी विन्दुओं को अपने अवचेतन से खींचकर, चेतना के धरातल पर लाते हुए, अपने चरित्र के दुर्बल और सबल पक्षों के साथ स्वयं को दो पृथक्-पृथक् पात्र बनाकर, आपको स्वयं से प्रश्न-प्रतिप्रश्न करने होंगे; उत्तर-प्रत्युत्तर देने होंगे; संवाद-प्रतिसंवाद करने होंगे।

निष्कर्षतः, जो-जो कार्य आपको नहीं करने चाहिए थे, उन्हें आपने क्यों किये थे? आप इन सभी के परिप्रेक्ष्य में आत्मपरीक्षण करते हुए, अभिनव वर्ष में संकल्प साधेंगे तो आपकी भावी दिशाएँ सकारात्मक सन्देश से सम्पूरित हो उठेंगी, जो ऊर्जा-ऊष्मा से सम्पृक्त आपकी अप्रतिहत जिजीविषा और जिगीषा को जीवन्तता प्रदान करेंगी।

आइए! मानस में धारण करें– एको अहम् सर्वेषाम्।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३ जनवरी, २०२१ ईसवी।)

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