आधा पेट खिलाकर जब मां खुद भूखे पेट सोती है, बीच चौराहे पर जब कोई बहन बेइज्जत होती है l
दहेज के दानों के हाथों जब बेटी फांसी पर होती है, जब निर्भया को न्याय नहीं मिलता और हर कोई अपराधियों के साथ होता है l
तब मैं रो पड़ता हूं और लेकर कलम बस लिखता हूं….
जब देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान होता है,
मां के पेट में ही उसी समय बेटी की हत्या होती है l
दहेज ना जुटने से घर में ही जवान बेटी बैठी होती है, लक्ष्मी होकर के भी वह खुद बेटी होने पर रोती है l
तब मैं रो पड़ता हूं और लेकर कलम बस लिखता हूं…आज हर एक बाप बेटी के जन्म होने पर रोता है, क्योंकि अब 5 और 7 साल की बेटियों का भी बलात्कार होता है l
पर शर्म तो तब आती है जब किसी बेटी का बाप किसी बेटी रेप कर रहा होता है ,
और किसी बहन का भाई उसका साथ दे रहा होता है l
तब मैं रो पड़ता हूं और लेकर कलम से लिखता हूं…
देश के गरीब का बच्चा देर रात भूखा सोता है
और अमीरों का कुत्ता डनलप पे होता है,
गरीबी से तंग पूरा परिवार जब जहर खाता है l
नशे में झूमता किसी का पति घर आता है,
तड़पते माता-पिता को छोड़ जब बेटा शहर आता है l तब मैं रो पड़ता हूं और लेकर कलम बस लिखता हूं….

प्रांशुल त्रिपाठी, विधि छात्र
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, मध्य प्रदेश