पश्चिमबंगाल के राज्यपाल पर यौन-उत्पीड़न का आरोप!

 विधायकोँ, सांसदोँ, मन्त्रियोँ, प्रशासनिक अधिकारियोँ आदिक पर महिलाओँ के साथ शारीरिक बलात्कार के आरोप प्राय: लगाये जाते रहे हैँ और वे सत्य सिद्ध भी होते रहे हैँ; दु:खद है, अब वैसे ही आरोप की परछाईँ राजभवन के भीतर तक प्रवेश कर चुकी है; और वह पश्चिमबंगाल का राजभवन है, जहाँ वहाँ के वर्त्तमान राज्यपाल सी० वी० आनन्द बोस पर राजभवन की ही एक महिला कर्मचारी ने उसके साथ किये गये शारीरिक दुष्कर्म के आरोप लगाये हैँ। उस पीड़िता का कहना है कि वह इसके लिए 'लाइ डिटेक्टर मशीन' का सामना करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर,  राजभवन, पश्चिमबंगाल के राज्यपाल ने चुप्पी साध रखी है और ग़ुलामवंश की मीडियापलिका ने भी।

पीड़िता ने सुस्पष्ट शब्दोँ मे कहा है :– राज्यपाल ने मेरे साथ दो बार दुष्कर्म किये हैँ। यदि राज्यपाल निर्दोष हैँ तो  भागे-भागे क्योँ फिर रहे हैँ? मै जानती हूँ, वे बहुत ताकतवर हैँ। मुझे पता है, मै एक हारी हुई जंग लड़ रही हूँ।
 
उल्लेखनीय है कि उक्त गम्भीर आरोप की जाँच के लिए पुलिस की ओर से गठित दल मे डी० सी० पी० सेण्ट्रल इन्दिरा मुखर्जी शामिल हैँ। दल गठित करने के बाद बताया गया था कि पुलिसदल राजभवन के छ: कर्मचारियोँ का बयान लेगा और राजभवन के सी० सी० टी० ह्वी० फुटेज भी माँगेगा। दूसरी ओर नितान्त लज्जास्पद प्रकरण की जाँच के लिए गठित पुलिसदल की सूचना पाते ही, राजभवन की ओर से निर्देश जारी कर दिया गया था– अनुच्छेद ३६१ के अन्तर्गत राज्य कोई काररवाई शुरू नहीँ कर सकता।  राजभवन का कोई भी कर्मचारी उक्त शर्मनाक घटना से सम्बन्धित कोई भी बात पुलिस वा अन्य किसी से नहीँ करेगा और न किसी को बतायेगा। उस पीड़िता को सेवाकार्य से मुक्त कर दिया गया है। अभी तक राजभवन के किसी कर्मचारी का बयान नहीँ लिया गया है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ११ मई, २०२४ ईसवी।)