कछौना (हरदोई): हरदोई जिले में सरकारी धान खरीद में प्रशासन व माफियाओं के गठजोड़ के चलते किसानों के नाम पर किए गए भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया है। इस कांड की उच्च स्तरीय जांच के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मेवाराम ने शासन-प्रशासन से मांग की है।
किसानों की आय दोगुनी का ढिंढोरा पीटने वाली मोदी सरकार ने किसानों की उपज धान का न्यूनतम मूल्य ₹17.70 निर्धारित किया गया है। जिसमें किसानों को पल्लेदारी का ₹20 प्रति कुन्टल शुल्क देने का प्रावधान था। जिले में बनाए गए क्रय केंद्रों पर पहुंचे किसानों को वहां पर बैठे केंद्र प्रभारियों ने मानकों का बहाना बताकर टरका दिया। जिसके बाद किसान अपनी उपज को औने-पौने दामों में बाजार में आढ़तियों के हाथ बेचने को विवश हैं। धान माफिया व केंद्र प्रभारी ने गठजोड़ करके चहेते किसानों का धान खरीद दर्शाकर लक्ष्य पूरा कर लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ किसानों का माफियाओं द्वारा मक्का खरीदा गया, उनके भुगतान में धान क्रय दिखाया गया है। यहां तक कुछ गाटा संख्या में धान की उपज हुई ही नहीं है, उस गाटा संख्या पर अन्य फसल व बाग दर्ज हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक दलाल ने बताया कि इस खेल में केंद्र प्रभारी का 50 रुपये प्रति कुन्टल व सहायक प्रभारी का 5 रुपये प्रति कुंटल व एफ०सी०आई० का 100 रुपये प्रति कुंटल सुविधा शुल्क का सिस्टम चल रहा है। यहां तक राइस मिलर्स बाहर के राज्यों से चावल मंगाकर लक्ष्य पूरा कर रहे हैं। पूरे धान खरीद में अनाज माफिया व प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपए का घोटाला किया जा रहा है। किसान की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है, केन्द्र प्रभारी गायब हैं। केवल बोर्ड लगाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है। केंद्र प्रभारी कागजों पर प्रतिदिन धान खरीद का लक्ष्य पूरा कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मेवाराम ने पूरे मामले की शिकायत कर भ्रष्टाचार की जांच शासन-प्रशासन से की। कोई सुनवाई न होने पर वह हाई कोर्ट की शरण में जाने को विवश होंगे।