उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में गुण्डों के सामने ‘अमेठी की पुलिस’ का आत्मसमर्पण और आदित्यनाथ की संवेदनहीनता!

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

       गुण्डों के विरुद्ध काररवाई कराने के लिए अमेठी की 'जामो थानान्तर्गत माँ-बेटी वहाँ के पुलिस और ज़िला-प्रशासन से मई, २०२० ई० से ज़मीन से सम्बन्धित एक विषय को लेकर  गुहार लगाती आ रही हैं; परन्तु बेईमान और भ्रष्ट प्रशासन अभी तक मौन बना हुआ है। जामो थानाध्यक्ष के सामने से वहाँ के गुण्डे २८ वर्षीया बेटी गुड़िया को उठा ले गये; उसे मारे-पीटे; अपमानित किये और वह थानाध्यक्ष देखता रह गया। प्रश्न है, कौन थे वे गुण्डे, जिन पर हाथ रखने की ताक़त पुलिस खो चुकी है अथवा कहें, अमेठी की पुलिस पुरुषार्थविहीन हो चुकी है।
 
       अन्तत:, अपने साथ न्याय होता न देखकर, १७ जुलाई को माँ-बेटी ने 'लोकभवन', लखनऊ के सामने (मुख्यमन्त्री-कार्यालय के समीप) अपराह्न ५.३०-६ बजे के मध्य आत्मदाह कर लिया था, जिसमें ५६ वर्षीया माँ सोफ़िया लगभग ८० प्रतिशत जल चुकी है।

     अमेठी की पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग अभी तक बेहोश थी, तभी तो मई से चले आ रहे ज़मीन-विवाद का वह निबटारा नहीं करा सकी। माँ-बेटी ख्याति गर्ग से महीनों पहले अपना दु:खड़ा सुनाया था; परन्तु वह भी मौन बनी रही। अब, जब माँ-बेटी जीवन-मौत से जूझ रही हैं तब उस पुलिस अधीक्षक की बेहोशी टूटी है। एक महिला पुलिस अधिकारी होकर भी उसे पीड़ित माँ-बेटी का दर्द समझ में नहीं आया या फिर वह समझना नहीं चाहती थी। 

    प्रश्न है, उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ संवेदनविहीन हो चुके हैं?

     हमारा 'मुक्त मीडिया' अमेठी के सभी पुलिस- अधिकारियों और ज़िलाधिकारी की गिरिफ़्तारी की माँग करता है। इतना अवश्य है, थानाध्यक्ष आदिक का निलम्बन दिखाकर मामले को शान्त कर दिया जायेगा। प्रथम दृष्ट्या अमेठी के ज़िलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, थानाध्यक्ष, सी०ओ० आदिक सहित सभी दोषी हैं और इन सभी पर आपराधिक मुक़द्दमे दर्ज़ कर जेल भेजना चाहिए, अन्यथा वे सभी मनबढ़ बने रहेंगे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ जुलाई, २०२० ईसवी)