अटल जी के ‘अस्थिकलश’ में भरे हैं, चुनावी गणित अपने पक्ष में करने के सूत्र

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


यहाँ रखे इन सभी कलश में स्मृति-शेष श्रद्धेय अटलबिहारी वाजपेयी जी की अस्थियाँ भरी हुई हैं, ऐसा बताया जाता है। देश के प्रधान चौकीदार को, देश की जनता ने जिस कार्य के लिए उसे चौकीदारी सौंपी है, उस कार्य से हटकर वह एक अलग क़िस्म की चौकीदारी में लगा हुआ है, जिसके कारण एक अनन्य प्रकार का प्रतिमान रेखांकित हो रहा है, वहीं नितान्त निरापद राजनीतिक स्वार्थ की गन्ध भी उस कलश से निकल रही है। यदि वास्तव में, उन कलश में आदरणीय अटल जी की अस्थियाँ ही हैं तो यह उनका कितना बड़ा अपमान है! जीवित रहने पर किया अपमान-न रहने पर दिया सम्मान!
इसे ऐसे समझें, जिस व्यक्ति (आदरणीय अटल जी) ने ‘भारतीय जनसंघ’ (चुनाव-चिह्न– ‘जलता हुआ दीया/दीपक’) और उसके बाद ‘भारतीय जनता पार्टी’ को बृहद् आकार देते हुए, भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित किया था, उसके प्रधानमन्त्री के पद से हटने/हटाने के बाद से वही लोग समादरणीय अटल जी को भावना और संवेदना-स्तर पर लगातार घायल करते रहे, जो आज उनकी दैहिक समुपस्थिति न रहने के बाद एक ऐसे महिमामण्डन में लगे हुए हैं, जो उन्हें वर्ष २०१९ के केन्द्रीय चुनाव में अतिशय कुत्सित-बीभत्स ‘लाभ’ से जोड़ता है।
मैं यहाँ यदि उन विषयों को यहाँ प्रस्तुत कर दूँ, जिन्हें समादरणीय अटल ने ” पृथ्वीनाथ जी! यह ऑफ़ दी रिकार्ड है”, कहते हुए बताया था तो देश की राजनीति में एक प्रकार का ‘भूचाल’ भी आ सकता है। हाँ, उनकी एक अन्य बात अवश्य यहाँ करूँगा। उनकी आँखें भर आयी थीं। उन्होंने बताया था, “पृथ्वीनाथ जी! आज की राजनीति मेरे जैसे व्यक्ति के लिए नहीं रह गयी है; क्योंकि देश की राजनीति समग्र में नहीं, ‘व्यक्तिपरक’ होती जा रही है। मेरा प्रिय विषय तो ‘पत्रकारिता’ और ‘साहित्य’ है। देश की राजनीति घुटन देती है।”
किसी को अच्छा लगे तो ठीक और बुरा लगे तो अपना रास्ता नापे; क्योंकि अब मैं जिस विषय को सम्पूर्ण देशवासियों के संज्ञान में लानेवाला हूँ, उसकी प्रभावकारिता किसी ‘तीखी मिर्ची’ से कम नहीं होगी। वह विषय यह है कि उपर्युक्त कलश में क्या है, क्या नहीं, इसे ‘प्रधान चौकीदार ऐण्ड कम्पनी’ के अतिरिक्त और कोई नहीं जानता है। हाँ, हम तो इतना अवश्य जानते हैं कि उन सभी स्वर्णिम कलश में आगामी राजनीतिक चुनावी गणित को साधने के लिए सूत्र भरे हुए हैं। यदि ऐसा नहीं तो मन्त्रियों और भारतीय जनता पार्टी के विधायकों-सांसदों आदिक को उनके मुख्य कार्यों से मुक्त कर, सुनियोजित ढंग से प्रधान चौकीदार’ के रोड-शो’ की शैली में देश के अनेक राज्यों में उक्त कलश-यात्रा निकालने के लिए दलीय और शासकीय स्तर पर निर्देश करने का औचित्य ही क्या है?
आज देश के समाचार-चैनलों के समाचारबोध, संचयन, सम्पादन तथा प्रस्तुति में घोर अवमूल्यन परिलक्षित हो रहा है। चैनलस्वामियों ने अपने-अपने चैनल को ‘सत्ताधारियों’ के समक्ष समर्पण कर दिया है। सवा अरब की जनसंख्यावाले देश की तुलना में स्वयं को प्रधान चौकीदार कहनेवाला व्यक्ति इतना विशिष्ट हो गया है कि उसके संकेत पर ‘क्रीतदास’ और ‘क्रीतदासी’ के रूप में जनप्रयोजन से परे रहकर देश के सभी समाचार-चैनल घुटने के बल रेंग रहे हैं? बलपूर्वक उन समाचार-चैनलस्वामियों को धिक्कार है!
(चित्र : प्रधान चौकीदार अपनी मुख्य चौकीदारी के कार्य से अलग हटकर कहीं और चौकीदारी करता हुआ।)
(सर्वाधिकार सुरक्षित– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २३ अगस्त, २०१८ ईसवी)